नयी दिल्ली, 21 सितंबर 2026 (भाषा)
उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सोमवार को सहमत हो गया, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में विवाद के बीच निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
शीर्ष अदालत से जल्द सुनवाई का अनुरोध
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख कर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। सिब्बल ने दलील दी, ‘‘वे एक अधिसूचना जारी करते हैं और अधिसूचना के बीच में ही चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा देते हैं। यह क्या हो रहा है? हम इस पर तत्काल सुनवाई चाहते हैं।’’
दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न आवंटित
निर्वाचन आयोग ने विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों के ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का उपयोग करने पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी थी और शुक्रवार को दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की दलील सुनने के बाद आयोग ने बृहस्पतिवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि इस मामले में निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के प्रावधानों के तहत विस्तृत रूप से निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है।
निर्वाचन आयोग और ऋतब्रत बनर्जी को बनाया प्रतिवादी
शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है।
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