प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, प्रधानमंत्री ने शोक व्यक्त किया

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रायपुर, 05 जुलाई 2026 (भाषा)

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककथा गायन शैली पंडवानी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई का रविवार को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं।

एम्स रायपुर के एक चिकित्सक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि तीजन बाई ने रविवार तड़के सवा तीन बजे आखिरी सांस ली, एम्स में 27 मई से उनका उपचार किया जा रहा था।

बचपन से ही था शौक

वर्ष 1956 में दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मी तीजन बाई को बचपन से ही महाभारत की कथाएं सुनने और उन्हें सुनाने का गहरा शौक था। सामाजिक विरोध और आर्थिक अभाव जैसी अनेक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प को नहीं छोड़ा। अपने अथक प्रयासों और अद्वितीय प्रतिभा के बल पर वह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय कलाकार बनकर उभरीं।

विदेशो में भी की वैश्विक पहचान हासिल

पंडवानी महाभारत के प्रसंगों को नाटकीय शैली, गायन और वाद्य संगीत के साथ प्रस्तुत करने वाली विशिष्ट लोककला है, जिसे तीजन बाई ने देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। अपनी दमदार आवाज, मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति और भावपूर्ण प्रस्तुति शैली के लिए प्रसिद्ध तीजन बाई ने पंडवानी को एक क्षेत्रीय लोक परंपरा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित लोककला का दर्जा दिलाया। उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में बड़े पैमाने पर प्रस्तुतियां दीं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए वैश्विक पहचान हासिल की।

कई अवॉर्ड से सम्मानित हैं तीजन बाई

भारतीय लोककलाओं में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से बहुत दुख हुआ। उन्होंने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोक कला को दुनिया भर में एक खास पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।’’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया शोक व्यक्त

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीजन बाई के निधन को न केवल लोककला जगत, बल्कि राज्य और देश की सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ पद्म विभूषण से सम्मानित और विश्वविख्यात पंडवानी कलाकार डॉ. तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।”

उन्होंने कहा कि अपनी विशिष्ट गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण के प्रति अटूट समर्पण के बल पर तीजन बाई ने वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को स्थापित किया। भारतीय लोककला और संस्कृति के संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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