नयी दिल्ली, 05 जुलाई 2026 (भाषा)
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर लगाए गए अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंध वापस ले लिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में संशोधन करते हुए उन प्रमुख प्रावधानों को हटा दिया, जिनके तहत घरेलू और आयातित गैस की आपूर्ति सरकार द्वारा तय प्राथमिकता सूची के अनुसार की जा रही थी।
एलएनजी की आवाजाही प्रभावित हुई थी
सरकार ने यह आपात व्यवस्था नौ मार्च को पश्चिम एशिया में संघर्ष के आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू की थी। उस समय अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरानी कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। कई आपूर्तिकर्ताओं ने अप्रत्याशित स्थिति (फोर्स मेज्योर) को लागू कर दिया था, जिससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य यातायात फिर से शुरू
मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा कि अब क्षेत्र में युद्धविराम लागू है, बातचीत जारी है और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात फिर से शुरू हो चुका है। ऐसे में गैस आपूर्ति पर लगाए गए आपात प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
गैस आपूर्ति से जुड़े प्रावधान समाप्त
पश्चिम एशिया संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन बड़े कदम उठाए थे। इनमें प्राकृतिक गैस आपूर्ति का नियंत्रण, रिफाइनरियों को पेट्रोरसायन के फीडस्टॉक की जगह एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश और थोक उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री सीमित करना शामिल था। एलपीजी उत्पादन और डीजल बिक्री से जुड़े दोनों प्रतिबंध पहले ही वापस लिए जा चुके हैं, जबकि अब गैस आपूर्ति से जुड़े प्रावधान भी समाप्त कर दिए गए हैं।
आधी जरूरत आयात से होती है पूरी
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की करीब आधी आवश्यकता आयात के जरिये पूरी करता है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40-45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का करीब 65 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। यही वजह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।
सरकार का कहना है कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने के बाद अब इन अस्थायी आपात प्रावधानों की आवश्यकता नहीं रह गई है।
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