नयी दिल्ली, 06 जुलाई 2026 (भाषा)
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘‘बलिदान’’ को सबसे सच्ची श्रद्धांजलि थी।
कांग्रेस के बोलबाले के बीच भारतीय जनसंघ की स्थापना
श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। मुखर्जी की जयंती के अवसर पर अखबारों में प्रकाशित अपने एक हस्ताक्षरित लेख में मोदी ने कहा कि उन्होंने हमेशा ‘‘भारत और भारतीय मूल्यों को सबसे ऊपर’’ रखा। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। मोदी ने कहा कि मुखर्जी के जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने ऐसे समय में भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया, जब देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था।
कौन थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ?
भारतीय जनसंघ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूर्ववर्ती संगठन है। छह जुलाई 1901 को जन्मे मुखर्जी का 23 जून 1953 को श्रीनगर में हिरासत के दौरान निधन हो गया था। उन्होंने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की मांग करते हुए जम्मू कश्मीर को शेष भारत के साथ पूरी तरह से एकीकृत करने के लिए संघर्ष किया था।
छह जुलाई का दिन देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष
मोदी ने कहा कि छह जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। उन्होंने लेख में लिखा, ‘‘हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं, जिनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।’’
सुख-सुविधाओं को छोड़ चुना राष्ट्रसेवा का मार्ग
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था और आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि मुखर्जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना।
370 हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि
मोदी ने कहा, ‘‘दशकों बाद, साल 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी।’’ मोदी सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 और 35(ए) को निरस्त कर दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया निजी अनुभव
अपना एक निजी अनुभव साझा करते हुए मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया। भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है।’’
मोदी ने याद दिलाई कांग्रेस की ‘आशंका’
मोदी ने कहा कि 75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए जिसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे और वह भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।’’
संकट के दौर में जनसेवा : एक समर्पित नायक
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था।
युवाओं से पूरी ऊर्जा के साथ जुटने की अपील
उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।’’
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