मुंबई, 12 अगस्त 2026 (भाषा)
मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में तीन बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
गौसिया चॉल में हुआ हादसा, खोज और बचाव कार्य जारी
बीएमसी ने इससे पहले कहा था कि घटना घाटकोपर के पड़ोसी इलाके कुर्ला में हुई थी। बीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन की घटना तड़के तीन बजकर 48 मिनट पर चिराग नगर स्थित गौसिया चॉल में हुई। उन्होंने बताया कि दमकल विभाग, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), एंबुलेंस सेवा और बीएमसी के वार्ड कर्मचारियों के दल मौके पर तैनात हैं तथा खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
मृतकों की पहचान :
- मोहम्मद समीर अंसारी (14)
- साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19)
- अबान आरिफ शेख (दो)
- मन्नत आरिफ शेख (चार)
- मरजीना आरिफ शेख (27)
घायलों की पहचान :
अधिकारी ने बताया कि इस घटना में घायल हुए सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को कुर्ला स्थित बीएमसी संचालित भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
रितु तावड़े भी पहुंचीं घटनास्थल पर
मुंबई की महापौर रितु तावड़े भी घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने वहां जारी खोज एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। अधिकारी ने बताया कि घटना स्थल तक पहुंचने के संकरे रास्तों ने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
सहायता राशि की घोषणा
महापौर ने प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को चार-चार लाख रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता और प्रत्येक घायल व्यक्ति के इलाज के लिए 50,000 रुपये देने की घोषणा की।
एक-एक व्यक्ति के जाने लायक संकरा रास्ता
बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भूस्खलन के दौरान विशाल चट्टानों ने कई मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता इतना संकरा है कि एक बार में केवल एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है, जिससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘वहां चलने तक के लिए जगह नहीं है। बमुश्किल एक व्यक्ति एक बार में गुजर सकता है और दो लोग आमने-सामने खड़े भी नहीं हो सकते।’’
क्रेन और बाल्टी के सहारे हटाया जा रहा मलबा
अधिकारी ने बताया कि संकरी जगह के कारण मौके पर मशीनरी तैनात करने की कोई गुंजाइश नहीं है, जिससे बचाव अभियान और भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘महज तीन से साढ़े तीन फुट की संकरी गलियों के कारण, मलबे को रेकर (एक तरह की क्रेन) की मदद से हटाया जा रहा है और फिर बाल्टी के सहारे हाथों से बाहर निकाला जा रहा है।’’
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