इंदौर में 75-वर्षीय व्यक्ति के हृदय से 180 ग्राम की दुर्लभ गांठ निकाली गई

इंदौर में 75-वर्षीय व्यक्ति के हृदय से 180 ग्राम की दुर्लभ गांठ निकाली गई
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इंदौर (मध्यप्रदेश), 14 जुलाई 2026 (भाषा)

इंदौर के एक अस्पताल में चिकित्सकों ने 75-वर्षीय एक व्यक्ति के हृदय के दाहिने हिस्से में करीब चार दशक पुरानी एवं 180 ग्राम वजनी गांठ (एट्रियल मायक्सोमा) को बाहर निकाल कर उसे नया जीवन दिया है।

सफल सर्जरी से बची जान

चिकित्सकों के अनुसार, करीब 9.5 सेंटीमीटर लंबी, 5.5 सेंटीमीटर चौड़ी और चार सेंटीमीटर ऊंची यह गांठ देश में सर्जरी के जरिये निकाला गया संभवतः सबसे बड़ा ‘एट्रियल मायक्सोमा’ हो सकता है।

75 वर्षीय बुजुर्ग में दिखे थे ये गंभीर लक्षण

मेदांता हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत पांडे ने मंगलवार को “पीटीआई-भाषा” को बताया कि 75-वर्षीय मरीज पिछले कुछ समय से सांस फूलने, सीने में दर्द, चक्कर आने तथा पैरों और पेट में सूजन की समस्या से जूझ रहा था तथा उसके यकृत संबंधी परीक्षण (एलएफटी) असामान्य पाए गए थे।

भारत का पहला मामला होने का दावा

पांडे ने बताया कि शुरुआती जांच में मरीज के हृदय की गांठ का आकार छोटा लग रहा था, लेकिन ऑपरेशन के जरिये बाहर निकाले जाने पर यह करीब 9.5 सेंटीमीटर लंबी, 5.5 सेंटीमीटर चौड़ी और चार सेंटीमीटर ऊंची मिली और इसका वजन लगभग 180 ग्राम पाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भारत में पहले किसी मरीज के हृदय से इतनी बड़ी गांठ निकाले जाने का मामला नहीं मिला।

35 साल पुराना रहस्य: धीरे-धीरे बढ़ता गया खतरा

पांडे के मुताबिक, मनुष्य के हृदय के दाहिने हिस्से में ऐसी गांठ केवल 10 से 15 प्रतिशत मामलों में मिलती है। हृदय रोग विशेषज्ञ ने कहा कि सामान्यतः यह बीमारी 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में पाई जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘मरीज के शरीर में यह गांठ 35 से 40 साल पहले विकसित होनी शुरू हुई होगी और धीरे-धीरे बढ़ते हुए इतनी बड़ी हो गई।’’

5 घंटे चली मेदांता की सर्जरी

पांडे ने बताया कि गांठ का आकार इतना बड़ा हो गया था कि उसने मरीज के हृदय के दाहिने आलिंद (एट्रियम) का अधिकांश हिस्सा भर दिया था, जिससे इसमें रक्त प्रवाह बाधित होने लगा, नतीजतन उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्होंने बताया कि 15-सदस्यीय एक दल ने छह जुलाई को करीब पांच घंटे की सर्जरी के जरिये गांठ को उसकी जड़ सहित निकाल दिया।

आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज

पांडे ने बताया कि यह ऑपरेशन सरकार की आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निःशुल्क किया गया। हृदय रोग विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘यदि समय पर ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो गांठ का कोई हिस्सा टूटकर फेफड़ों की रक्त वाहिका को अवरुद्ध कर सकता था, जिससे मरीज की मृत्यु तक हो सकती थी।’’ उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

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