उच्चतम न्यायालय ने रथ यात्रा के बाद महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म की रिलीज की अनुमति दी

उच्चतम न्यायालय ने रथ यात्रा के बाद महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म की रिलीज की अनुमति दी
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नयी दिल्ली, 17 जुलाई 2026 (भाषा)

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एनिमेटिड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के उत्सव समाप्त होने के बाद देशभर में 28 जुलाई या उसके पश्चात रिलीज करने की अनुमति दे दी।

एनिमेटिड फिल्म को प्रमाणपत्र जारी

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि यह एनिमेटिड फिल्म उस वेब सीरीज पर आधारित है, जिसे पहले ही यूट्यूब पर जारी किया जा चुका है। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म के प्रदर्शन के लिए प्रमाणपत्र जारी कर दिया है।

फिल्म निर्माता सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे?

फिल्म के निर्माताओं ने ओडिशा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एले एनिमेशंस प्राइवेट लिमिटेड को फिल्म रिलीज करने से रोक दिया गया था। यह फिल्म आज सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली थी। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बृहस्पतिवार से शुरू हो चुकी है।

उड़ीसा हाईकोर्ट ने रिलीज पर रोक क्यों लगाई?

ओडिशा उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर गहन न्यायिक समीक्षा आवश्यक है इसलिए, जब तक इन आपत्तियों की विस्तार से जांच नहीं हो जाती, तब तक फिल्म का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा विवाद?

उच्च न्यायालय की पीठ ने यह अंतरिम आदेश अंगुल निवासी महेश कुमार साहू, पुरी के डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और निमापाड़ा के उमाशंकर आचार्य द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। याचिका में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को दिए गए प्रमाणपत्र को रद्द करने और ओडिशा में फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन, संवाद, साहसिक घटनाओं और युद्ध संबंधी दृश्यों को काल्पनिक रूप में दिखाए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह चित्रण स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण तथा श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के विपरीत है।

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