पुरी, 16 जुलाई 2026 (भाषा)
ओडिशा के पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई।
रथों पर विराजमान हुए महाप्रभु जगन्नाथ और भाई-बहन
‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है। घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया।
तालध्वज रथ पर विराजे बलभद्र
पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा ‘शून्य पहंडी’ (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।
महाप्रभु के रथारोहण पर झूमे लाखों श्रद्धालु
अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया। ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने ‘कालिया ठाकुर’ के सामने प्रस्तुति दी।
शुरू हुई महाप्रभु की नौ दिवसीय रथयात्रा
‘पहंडी’ अनुष्ठान में तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये रथ मंदिर के ‘सिंह द्वार’ के सामने खड़े किए जाते हैं, ताकि उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा सके। इस 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार रथ यात्रा के अनुष्ठान पूर्वाह्न नौ बजे शुरू हुए।
बिना किसी रुकावट के खींचे जाएंगे महाप्रभु के रथ
अधिकारियों ने बताया कि ‘बड़ा डंडा’ से बारिश का पानी निकालने और रथों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं, क्योंकि भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक इसी रास्ते से खींचकर ले जाएंगे।
शंकराचार्य के आगमन के बाद शुरू होगा रथों का सफर
मंदिर के एक पदाधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती पुरी रियासत के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब द्वारा पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ (रथों में झाड़ू लगाने की रस्म)करने और पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के आने के बाद, शाम चार बजे भक्त रथ खींचना शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि हर साल उड़िया महीने ‘आषाढ़ शुक्ल तिथि’ (चंद्रमा के बढ़ने वाले पखवाड़े) के दूसरे दिन आयोजित होने वाली रथ यात्रा ही वह एकमात्र मौका है, जब भाई-बहन के रूप में पूजे जाने वाले देवी-देवताओं के विग्रहों को ‘रत्न सिंहासन’से उतारकर मंदिर से बाहर लाया जाता है।
पुरी में 13,000 पुलिसकर्मी और 19 IPS अधिकारी तैनात
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई बी खुरानिया ने बताया कि पुरी में कई स्तरों पर सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं और इस उत्सव के लिए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 19 अधिकारियों और लगभग 13,000 अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएस), त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) सहित केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 15 कंपनियों को रणनीतिक जगहों पर तैनात किया गया है।
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