पुरी (ओडिशा), 18 जुलाई 2026 (भाषा)
पुरी में रथ यात्रा के पहले चरण के समापन के तहत शनिवार को भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को गुंडिचा मंदिर में प्रवेश कराया जाना है तथा इस अवसर पर ‘अडापा बीजे’ अनुष्ठान में शामिल होने के लिए रातभर हुई भारी बारिश की परवाह नहीं करते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।
गुंडिचा मंदिर पहुंचे तीनों रथ
रथ यात्रा के एक दिन बाद, शुक्रवार दोपहर तीनों देवी-देवताओं के रथ श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए थे। परंपरा के अनुसार, उनकी प्रतिमाएं रातभर रथों पर ही विराजमान रहीं।
जन्मस्थान गुंडिचा मंदिर में प्रवेश करेंगे भगवान
इसके बाद ‘अडापा बीजे’ अनुष्ठान संपन्न होगा, जिसके तहत भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को भव्य शोभायात्रा के साथ गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा। इस मंदिर को इन तीनों भाई-बहनों का जन्मस्थान माना जाता है। वापसी की रथ यात्रा, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है, 24 जुलाई को आयोजित होगी।
सड़कों पर लंबा जाम और जलभराव
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पुरी जाने वाली सड़कों पर लंबा जाम लग गया। वहीं, भारी बारिश के कारण हुए जलभराव ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दीं। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने उच्च क्षमता वाले पंप की मदद से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है।
ट्रैफिक को लेकर लगातार जारी हो रहे अलर्ट
रथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सौमेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि शुक्रवार रात से ही पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने कहा, ‘‘हम यातायात की स्थिति को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अलर्ट जारी कर रहे हैं, ताकि लोग भुवनेश्वर से पुरी की यात्रा की बेहतर योजना बना सकें। भुवनेश्वर से पुरी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-316 पर लगभग 60 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी हुई है।’’
रथों पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़
भारी जाम को देखते हुए पुरी में स्थापित यातायात नियंत्रण कक्ष ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कुछ घंटों के लिए अपनी यात्रा स्थगित कर दें, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की संख्या कम होने के बाद यातायात सामान्य हो सके। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और पुरी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार रात और शनिवार को पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, क्योंकि लोग रथों पर विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन करना चाहते थे।
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