नयी दिल्ली, 24 नवंबर 2025 (भाषा)
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत को शपथ दिलाई और उन्होंने हिंदी में शपथ ली। न्यायमूर्ति सूर्यकांत को न्यायमूर्ति बी आर गवई के स्थान पर न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति गवई रविवार को सेवानिवृत्त हो गए।
30 अक्टूबर को प्रधान न्यायाधीश नियुक्त हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत को 30 अक्टूबर को अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे। वह नौ फरवरी 2027 को 65 वर्ष की उम्र होने पर यह पद छोड़ देंगे। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता इस समारोह में शामिल हुए। शपथ लेने के तुरंत बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन करने उनके पास गए।
प्रधानमंत्री ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत को दी शुभकामनाएं
बाद में, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर शपथ ग्रहण समारोह की तस्वीरें साझा कीं। प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘‘ न्यायमूर्ति सूर्यकांत के भारत के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने के समारोह में शामिल हुआ। उनके आगे के कार्यकाल के लिए उन्हें शुभकामनाएं।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत का वकील से लेकर न्यायिक पद का सफ़र
हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं। वह राष्ट्रीय महत्व और संवैधानिक मामलों के कई फैसलों और आदेशों का हिस्सा रहे। उन्हें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर में ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कई उल्लेखनीय फैसले देने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पांच अक्टूबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
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