उज्जैन, 22 जून (भाषा):
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने मौके पर उपस्थित विद्यार्थियों व नागरिकों को ‘जीरो शेडो डे’ की खगोलीय घटना का वैज्ञानिक अवलोकन कराया और सूर्य की गति, समय परिवर्तन व भारतीय कैलेंडर की गणना की विस्तृत जानकारी दी।
क्या होता है ‘Zero Shadow Day’?
हर वर्ष 21 जून को, दोपहर 12:28 बजे के लगभग, डोंगला वेधशाला में स्थापित शंकु यंत्र की छाया गायब हो जाती है। यह खगोलीय घटना तब घटती है जब सूर्य ठीक हमारे सिर के ऊपर स्थित होता है।
मुख्यमंत्री की बातों की मुख्य झलकें:
- “भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।”
- “प्राचीन काल में डोंगला कालगणना का प्रमुख केंद्र था, और इसे फिर से उसी गौरव के साथ स्थापित किया जाएगा।”
- “सनातन संस्कृति शिक्षा और विज्ञान के माध्यम से विश्व कल्याण की बात करती है, न कि युद्ध या हिंसा से।”
वेधशाला को फिर से बनेगा ‘काल गणना केंद्र’
मुख्यमंत्री यादव ने ऐलान किया कि डोंगला वेधशाला को आने वाले समय में कालगणना के आधुनिक और पारंपरिक केंद्र के रूप में पुनः विकसित किया जाएगा, जिससे युवाओं में वैज्ञानिक चेतना का विस्तार हो।
मुख्यमंत्री द्वारा खगोल विज्ञान को सरल भाषा में समझाया जाना न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, बल्कि यह युवाओं को भारत की प्राचीन वैज्ञानिक विरासत से जोड़ने की भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
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