नयी दिल्ली, 14 अगस्त 2025 (भाषा)
उच्चतम न्यायालय ने रेणुकास्वामी हत्याकांड में अभिनेता दर्शन और अन्य आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो, कानून के समक्ष सभी समान हैं।
शीर्ष अदालत ने की जमानत रद्द
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसमें कई खामियां हैं। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को दर्शन एवं अन्य आरोपियों को तुरंत हिरासत में लेने तथा शीघ्रता से सुनवाई का आदेश दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘हमने हर पहलू पर विचार किया। जमानत देने और उसे रद्द करने पर भी…। यह स्पष्ट है कि उच्च न्यायालय के आदेश में गंभीर खामियां हैं और यह एक यांत्रिक तरीके को दर्शाता है। इसके अलावा उच्च न्यायालय ने सुनवाई से पहले के चरण में ही समीक्षा शुरू कर दी।’’ पीठ ने कहा, ‘‘अधीनस्थ अदालत ही उचित मंच है। पुख्ता आरोपों और फोरेंसिक साक्ष्यों से जमानत रद्द करने के आधार की पुष्टि होती है। याचिकाकर्ता की जमानत रद्द की जाती है।’’
क्या हैं रेणुकास्वामी हत्याकांड मामला
दर्शन पर अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर 33 वर्षीय रेणुकास्वामी नामक एक प्रशंसक का अपहरण करने और उसे प्रताड़ित करने का आरोप है। रेणुकास्वामी ने पवित्रा को अश्लील संदेश भेजे थे।पुलिस ने आरोप लगाया कि रेणुकास्वामी को जून 2024 में तीन दिन तक बेंगलुरु के एक ‘शेड’ में रखा गया, प्रताड़ित किया गया और उसका शव एक नाले से बरामद हुआ। शीर्ष अदालत ने 24 जनवरी को राज्य सरकार की याचिका पर दर्शन, गौड़ा और अन्य को इस मामले में नोटिस जारी किए थे।
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