महाराष्ट्र में भारी बारिश से सात लोगों की मौत, 200 ग्रामीण फंसे

महाराष्ट्र में भारी बारिश से सात लोगों की मौत, 200 ग्रामीण फंसे
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मुंबई, 19 अगस्त 2025 (भाषा)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण सात लोगों की मौत हो गई है। लगातार बारिश से नांदेड़ जिले में 200 से अधिक ग्रामीण फंस गए, जिसके कारण अधिकारियों को बचाव और राहत कार्यों के लिए सेना को तैनात करना पड़ा।


जलभराव, भूस्खलन और बचाव अभियान

मुंबई में आठ घंटों में 170 मिलीमीटर बारिश हुई। यहां 14 जगहों पर जलभराव हुआ, लेकिन केवल दो जगहों पर यातायात बाधित हुआ। कोंकण में कुछ नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और जलगांव में भारी नुकसान हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अलमाटी बांध पर कर्नाटक सरकार के साथ लगातार समन्वय जारी है..।’’ मुंबई से करीब 600 किलोमीटर दूर नांदेड़ जिले के मुखेड़ तालुका से पांच लोग लापता बताए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) ने रविवार को भारी बारिश के बीच मुखेड़ तालुका के रावनगांव और हसनाल गांवों में फंसे 21 लोगों को बचाया। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के सात जिलों में पिछले पांच दिनों में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 205 पशुधन की हानि हुई है।


फसल बर्बाद, 800 गांव भारी बारिश से प्रभावित

उन्होंने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर मंडल में 800 गांव भारी बारिश से प्रभावित हैं। विदर्भ में लगभग दो लाख हेक्टेयर से ज़्यादा फसल बर्बाद होने की खबर है। उन्होंने कहा कि तालुका में स्थित महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच अंतर-राज्यीय सिंचाई परियोजना लेंडी बांध के जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि लातूर, उदगीर और पड़ोसी कर्नाटक से बड़ी मात्रा में पानी इस क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है।


ठाकरे ने लगाया घोटाले के कारण सड़कें खराब होने का आरोप

मुंबई में भारी बारिश के कारण निचले इलाके जलमग्न हो जाने के बीच शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने सोमवार को आरोप लगाया कि एक घोटाले के कारण सड़कें खराब हो गई हैं और उन्होंने स्थिति से निपटने में बीएमसी की तैयारियों पर सवाल उठाये। ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि चुनाव नहीं हो पाने के कारण पिछले तीन सालों से बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर राज्य सरकार का नियंत्रण है। यहां कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है, लेकिन चुनाव न होने का मतलब जवाबदेही का अभाव भी है।

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