सशस्त्र बलों को लंबे संघर्षों के लिए तैयार रहना चाहिए : राजनाथ सिंह

सशस्त्र बलों को लंबे संघर्षों के लिए तैयार रहना चाहिए : राजनाथ सिंह
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महू (मध्यप्रदेश), 27 अगस्त 2025 (भाषा)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि अप्रत्याशित भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए देश के सशस्त्र बलों को अल्पकालिक संघर्षों से लेकर पांच साल तक के युद्ध सहित सभी प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।


‘रण संवाद 2025’ के दूसरे दिन बोले राजनाथ सिंह

महू सैन्य छावनी के आर्मी वॉर कॉलेज में तीनों सेनाओं की संयुक्त संगोष्ठी ‘रण संवाद 2025’ के दूसरे और अंतिम दिन पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत किसी की जमीन नहीं चाहता, लेकिन अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। सिंह ने कहा, ‘‘आज के दौर में युद्ध इतने अचानक और अप्रत्याशित हो गए हैं कि यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि कोई युद्ध कब समाप्त होगा और कितने समय तक चलेगा।’’


राष्ट्रीय सुरक्षा संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण का मुद्दा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि अगर कोई युद्ध दो महीने, चार महीने, एक साल, दो साल, यहां तक कि पांच साल तक भी चलता है, तो हमें उसके लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।’’ सिंह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सेना का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह ‘‘संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण’’ का मुद्दा बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए, लेकिन हम अपनी जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।’’


सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए तीनों सेनाओं की सराहना की

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए तीनों सेनाओं की सराहना की और कहा कि यह अभियान भारत के स्वदेशी मंचों, उपकरणों और हथियार प्रणालियों की सफलता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। सिंह ने कहा, ‘‘इस अभियान की उपलब्धियों ने एक बार फिर रेखांकित किया है कि आने वाले समय में आत्मनिर्भरता एक परम आवश्यकता है। हमने आत्मनिर्भरता के मार्ग पर महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन हमें अब भी एक लंबा रास्ता तय करना है।’’ सिंह ने कहा, ‘‘अगर हम ऑपरेशन सिंदूर की बात करें, तो यह वास्तव में तकनीक-संचालित युद्ध का एक अद्भुत प्रदर्शन था।’’

‘रण संवाद 2025’ में तीनों सेनाओं के अधिकारियों ने रक्षा क्षेत्र की मौजूदा व भावी चुनौतियों और इनसे निपटने के उपायों पर विचार मंथन किया। इस दौरान कुछ संयुक्त सिद्धांत भी जारी किए गए।

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