कोलकाता, 21 अगस्त 2026 (भाषा)
पश्चिम बंगाल में त्योहारों के मद्देनजर खुदरा बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।
चीनी ₹20 और अन्य उत्पाद 10% तक महंगे
पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले चार-पांच दिन में ही कीमतों में अचानक 10 प्रतिशत का उछाल आया है। चीनी से बने उत्पादों जैसे गुड़, बताशा और नकुलदाना के दाम में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हुई है।
क्या थम जाएगी कीमतों की रफ्तार?
कारोबारियों ने कहा कि केंद्र ने बृहस्पतिवार शाम चीनी मिलों को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है। करीब एक दशक बाद इस तरह का कदम उठाया गया है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजारों तक नहीं पहुंचा है। सरकार ने उन थोक खरीदारों पर भी भंडार सीमा लगा दी है जो महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करते हैं। उनके पास 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का भंडार रखने की सीमा तय की गई है।
खुदरा दुकानों पर रोज बदल रहे दाम
कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन (सीडब्ल्यूबीटीए) के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है और थोक कीमतें पहले ही 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। एक स्थानीय किराना दुकान के मालिक ने कहा, ‘‘मैंने सिर्फ तीन दिन पहले खुली चीनी 65 रुपये किलोग्राम बेची पर थी लेकिन आज मैं इसे 70 रुपये किलोग्राम से कम में नहीं बेच सकता।’’
पोद्दार बोले – वाहनों को भी पहुंच रहा नुकसान
पोद्दार ने कहा, ‘‘चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। थोक कीमतें पहले ही बढ़कर 65 रुपये किलोग्राम हो गई हैं और खुदरा कीमतें करीब 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच जाएंगी। एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना इसकी प्रमुख वजहों में से एक है। इसके अलावा, एथनॉल का अधिक मात्रा में मिश्रण से अब वाहनों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी चिंता का विषय है। सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देना कीमतों में वृद्धि रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और अधिक हस्तक्षेप की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा कि 10 लाख टन चीनी देश की करीब दो सप्ताह की मांग के बराबर ही है।
एथनॉल नहीं, जमाखोरी है वजह : दिलीप घोष
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल मिश्रण को नहीं बल्कि जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, एक प्रमुख चीनी मिल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि चीनी की पेराई अप्रैल में खत्म हो गई थी और मिलें अब केवल अपने भंडार से चीनी जारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समय मिलें इससे अधिक कुछ नहीं कर सकतीं।
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