भोपाल, 17 सितंबर 2026 (भाषा)
मध्यप्रदेश सरकार ने रीवा के एक अस्पताल में मरीजों के इलाज में कथित लापरवाही और अनियमितताओं की जांच के बाद एक महिला डॉक्टर की सेवाएं समाप्त कर दी और एक औषधि निरीक्षक को निलंबित कर दिया।
डॉक्टर को सेवा से हटाया गया
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रीवा के सरकारी श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनल अग्रवाल को बुधवार से उनकी सेवाओं से मुक्त कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट के बाद गिरी डॉक्टर पर गाज
यह कार्रवाई एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा एक शिकायत की जांच के बाद की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अग्रवाल ने कथित तौर पर मरीजों को निजी नर्सिंग होम में जाने के लिए मजबूर किया था। समिति ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
स्वायत्त सेवाओं के लिए हमेशा के लिए अयोग्य घोषित
अधिकारियों ने बताया कि उनके स्पष्टीकरण और जांच रिपोर्ट की जांच के बाद मध्यप्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज अकादमिक मॉडल सेवा नियम, 2018 के तहत कार्यकारी समिति के प्रस्ताव के आधार पर कार्रवाई की गई। सरकार के अनुसार, अग्रवाल भविष्य में किसी भी सरकारी या स्वायत्त सेवा के लिए भी अयोग्य होंगी।
जांच के बाद औषधि निरीक्षक सस्पेंड
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा गठित एक समिति की कार्यवाही के बाद रीवा में प्रसव के दौरान कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में औषधि निरीक्षक राधेश्याम बत्ती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बत्ती के खिलाफ मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमों के तहत कथित गंभीर लापरवाही, मनमानी और अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई की गई है।
आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उप निदेशक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (शहडोल जिला) कार्यालय में निर्धारित किया गया है। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि रीवा के अथर्व ब्लड सेंटर में कथित अनियमितताओं को लेकर संबंधित अधीनस्थ औषधि निरीक्षक के माध्यम से आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
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