मुंबई, 05 अगस्त 2026 (भाषा)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि आरबीआई अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने की तैयारी कर रहा है।
कागजी नोट की तुलना में अधिक टिकाऊ
पॉलिमर नोट एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक जैसे सिंथेटिक पदार्थ से बनाया जाता है। इसमें एक मजबूत और लचीली प्लास्टिक फिल्म का इस्तेमाल होता है, जिस पर नोट की छपाई की जाती है। ये नोट कागजी नोट की तुलना में अधिक टिकाऊ होंगे और जल्दी खराब नहीं होंगे।
अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से चलन में लाने का लक्ष्य
मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद मल्होत्रा ने संवाददाताओं से कहा कि कुछ देशों में पॉलिमर नोट का 30 वर्षों से अधिक समय तक चलने का रिकॉर्ड हैं। ये नोट खासतौर पर कम मूल्य वर्ग के नोटों के लिए उपयोगी होंगे, क्योंकि इनका उपयोग और चलन अधिक होता है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर सभी योजनाएं तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो हमारा लक्ष्य है कि ये नोट अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में चलन में आ जाएं।’’
खुदरा महंगाई को 4% पर बनाए रखने का लक्ष्य
आरबीआई गवर्नर ने ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के रुख को लेकर कहा कि केंद्रीय बैंक के भविष्य के फैसले आंकड़ों पर आधारित होंगे। आरबीआई का मुख्य उद्देश्य मध्यम अवधि में खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बनाये रखना है।
समय से पहले बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं
विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) योजना पर मल्होत्रा ने कहा कि इसके तहत विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत रहा है और सीमित अवधि वाली इस योजना के समाप्त होने तक पूंजी प्रवाह के बेहतर बने रहने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि चूंकि विदेशी पूंजी आकर्षित करने की लागत केंद्रीय बैंक वहन कर रहा है, ऐसे में क्या आरबीआई इस योजना को समय से पहले बंद करने पर विचार कर रहा है, मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
रुपये में नहीं दिखी अपेक्षित तेजी
रुपये की मजबूती को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी प्रवाह अधिक होने के बावजूद रुपये में अपेक्षित तेजी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक तनाव कम होते हैं तो रुपये में और मजबूती संभव है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘आरबीआई का यह प्रयास होगा कि रुपये की गति व्यवस्थित और स्थिर बनी रहे।’’
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