देश में ‘जीनोम एडिटिंग’ से बढ़ाएंगे सोयाबीन की पैदावार : शिवराज सिंह चौहान

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जीनोम एडिटिंग से उन्नत किस्में विकसित करने पर जोर

इंदौर (मध्यप्रदेश), 26 जून (भाषा)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ‘जीनोम एडिटिंग’ की मदद से सोयाबीन की उन्नत किस्में विकसित करके इस तिलहन फसल की पैदावार बढ़ाएगी।


उत्पादकता स्थिर होने पर चिंता
उन्होंने देश में सोयाबीन की उत्पादकता ‘स्थिर’ हो जाने का उल्लेख करते हुए यह बात कही।


राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान में संवाद
चौहान ने इंदौर के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान में इस तिलहन फसल की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित कार्यक्रम में हितधारकों से संवाद किया।


अन्य देशों से तुलना
इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे देश में सोयाबीन की उत्पादकता स्थिर हो गई है, जबकि दुनिया के कई देशों में इस तिलहन फसल की उत्पादकता हमसे ज्यादा है।’’


जीन संवर्धन नहीं, जीनोम एडिटिंग का प्रयोग
कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘हम ब्राजील जैसे देशों की तरह सोयाबीन के जीन संवर्धित (जीएम) बीजों का इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन हम जीनोम एडिटिंग जैसी पद्धति का प्रयोग करके ज्यादा पैदावार देने वाली उन्नत किस्में विकसित करेंगे।’’


जीनोम एडिटिंग की परिभाषा
फसलों में ‘जीनोम एडिटिंग’ ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग पौधों के जीनोम में विशिष्ट डीएनए अनुक्रमों को बदलने के लिए किया जाता है। इससे फसलों में वांछित गुण डाले जा सकते हैं।


लागत घटाने और तकनीकी सुधार की बात
चौहान ने कहा कि देश में सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही इसकी खेती की लागत घटाने की भी जरुरत है।


किसानों की जरूरत के अनुसार अनुसंधान
उन्होंने कहा कि सोयाबीन उत्पादक किसानों की जरुरतों के मुताबिक अनुसंधान परियोजनाओं को आकार दिया जाएगा और खेती की तकनीकों में बदलाव किया जाएगा।


प्रोटीन स्रोत और निर्यात को बढ़ावा
चौहान ने कहा, ‘‘सोयाबीन प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। हम देश में सोयाबीन के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के निर्माण के साथ ही सोया खली के निर्यात को बढ़ावा देंगे।’’


पाम तेल आयात पर सरकार की रणनीति
देश में पाम तेल के बड़े पैमाने पर आयात को नियंत्रित करने के उपायों के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार इस विषय में समय-समय पर संतुलन बनाती है। हमें अपनी घरेलू आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पिछले कई वर्षों से खाद्य तेलों का आयात करना पड़ रहा है। हालांकि, हम अपनी आयात-निर्यात नीति के जरिये सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के हित सुरक्षित रहें।’’


एमएसपी और किसानों को राहत
मौजूदा समय में भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का 60 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। सस्ते खाद्य तेलों के आयात से घरेलू किसानों को सोयाबीन के कम भाव मिलने पर कृषि मंत्री ने कहा कि इस तिलहन फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित की जाएगी।


सोयाबीन का नया एमएसपी तय
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,328 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह पिछले विपणन सत्र के 4,892 रुपये प्रति क्विंटल के सोयाबीन के एमएसपी के मुकाबले 436 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।

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