कोलकाता, 06 मई 2026 (भाषा)
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम “जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश” है। बनर्जी के इस फैसले से राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसको लेकर संविधान में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। साथ ही इससे राजनीतिक टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
नतीजे साजिश, पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं
भाजपा द्वारा 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल करने और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद बनर्जी ने नतीजों को “साजिश करके गढ़ा हुआ” बताकर खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को सिर्फ 80 सीट ही मिल सकीं। उन्होंने कहा, “हम भाजपा से नहीं लड़ रहे थे; हम निर्वाचन आयोग से लड़ रहे थे, जो भाजपा के लिए काम कर रहा था। मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा।’’
मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं : ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश लूटा गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?’’ उन्होंने खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।’’
मतगणना केंद्र में बदसलूकी का दावा
बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की “लूट” हुई है और उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ‘‘कल मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई।’’ उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर “गुंडों” जैसा व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा, “इतिहास में एक काला अध्याय लिख दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं।”
क्या पहले भी ऐसी स्थिति आई है?
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव हारने के बाद किसी पराजित मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो। उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक अभूतपूर्व क्षण साबित हो सकता है।
एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते
संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नये मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करते ही ममता बनर्जी को पद छोड़ना होगा। उन्होंने कहा, “एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते।” उन्होंने कहा कि बनर्जी निवर्तमान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं और विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा, “संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार को भी जाना पड़ता है।”
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने क्या कहा?
ममता बनर्जी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सामने मौजूद संवैधानिक या कानूनी विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक अनुशासन के अनुसार उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा, “लेकिन, नयी विधानसभा का चुनाव हो चुका है और जल्द ही भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करेगा और राज्यपाल द्वारा उसे मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाएगा। अगर बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें (बनर्जी को) बर्खास्त कर देंगे।’’
मैं सड़कों पर रहूँगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूँगी…..
उस वर्ष वाम-विरोधी लहर के बल पर सत्ता में आईं ममता बनर्जी ने खुद को एक जमीनी कार्यकर्ता से प्रशासक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “जब तक मैं कुर्सी पर थी, मैंने बहुत कुछ सहन किया। अब मैं एक स्वतंत्र पंछी हूँ, एक आम इंसान हूँ। मैं एक जमीनी कार्यकर्ता हूँ। मैं सड़कों पर रहूँगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूँगी।” साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संवैधानिक विकल्प अभी भी खुले हैं। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, “वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।”
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