हाइलाइटस
| 1. तुर्कमान गेट हिंसा के सभी 12 आरोपियों को जमानत मिली। 2. कोर्ट ने ₹50,000 के निजी मुचलके पर रिहा किया। 3. अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई थी यह हिंसा। |
नयी दिल्ली, 18 फरवरी 2026 (भाषा)
दिल्ली की एक अदालत ने तुर्कमान गेट हिंसा मामले के सभी 12 आरोपियों को मंगलवार को यह कहते हुए जमानत दे दी कि इस स्तर पर याचिकाकर्ताओं की “स्पष्ट और निर्विवाद पहचान” स्थापित नहीं की जा सकी है, जिसके आधार पर उनकी हिरासत को जायज ठहराया जा सके।
क्या है मामला?
यह मामला छह-सात जनवरी की दरमियानी रात को रामलीला मैदान क्षेत्र में एक मस्जिद के पास अतिक्रमण-विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से संबंधित है। सोशल मीडिया पर तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराए जाने की अफवाह फैलने के बाद क्षेत्र में भीड़ जुट गई थी। पुलिस का आरोप है कि 150-200 लोगों की भीड़ ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के कर्मचारियों पर पथराव किया था तथा कांच की बोतलें फेंकी थीं, जिससे एक थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
इन लोगों को दी जमानत
उन्होंने मोहम्मद काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद उबैदुल्लाह, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद अदनान, समीर हुसैन, मोहम्मद नावेद, मोहम्मद अतहर, मोहम्मद अरीब, आमिर हमजा, मोहम्मद आदिल और अदनान को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी।
जमानत संबंधी लागू कीं कुछ शर्तें
न्यायमूर्ति सिंह ने याचिकाकर्ताओं पर जमानत संबंधी कुछ शर्तें लागू कीं, जिनमें सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत के समक्ष पेश होना, जांच में पूरी तरह से सहयोग करना, सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना, गवाहों को प्रभावित न करना, मोबाइल फोन को हमेशा चालू अवस्था में रखना तथा उसकी लोकेशन सर्विस सक्रिय रखना और सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित कोई भी सामग्री प्रसारित न करना शामिल है।
अभियोजन पक्ष ने दी दलीलें
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह घटना ड्रोन निगरानी और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग माध्यमों के जरिये रिकॉर्ड हो गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि “सुनवाई के दौरान इस न्यायालय के समक्ष कोई विशिष्ट फुटेज नहीं चलाया गया, जिससे प्रथम दृष्टया यह साबित हो सके कि मौजूदा याचिकाकर्ताओं में से कोई भी पथराव में सक्रिय रूप से शामिल था या कोई विशिष्ट प्रत्यक्ष कृत्य कर रहा था।”
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि अन्य सामग्री भले ही केस डायरी का हिस्सा हो सकती है, लेकिन “इस स्तर पर स्पष्ट पहचान का अभाव आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता का आकलन करने के सीमित उद्देश्य के लिहाज से प्रासंगिक हो जाता है, खास तौर पर पहचान और व्यक्तिगत भूमिका को लेकर विवाद के मद्देनजर।”
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