कटनी : शासकीय भूमि पर कब्जा कर की खुदाई तो निकले मानव कंकाल 

शासकीय भूमि पर कब्जा कर की खुदाई तो निकले मानव कंकाल 
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आरोप पुरातात्विक नगरी बिलहरी में मिट्टी बेची, इधर-उधर बिखरे मृतकों के कंकाल, लोगों में आक्रोश

कटनी, 18 फरवरी 2026 (दैमप्र)

राजा कर्ण की पुष्पवती नगरी जहां हर रोज राजा द्वारा सवा मन सोना दान होता किया जाता था उस प्रसिद्ध प्राचीन विरासत के लिए जानी जाने वाली आज के बिलहरी की धरती ने सोना तो नहीं लेकिन मानव कंकाल के अवशेष उगलने शुरु कर दिए हैं और यह मामला जब प्रकाश में आया तो इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने कई बार शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और केवल खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पूरा मामला शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। जनसुनवाई में शिकायत लेकर पहुंचे मनोज कुमार, संजय चक्रवर्ती और रमेश चक्रवर्ती सहित दर्जनों ग्रामीणों ने लिखित शिकायत कलेक्टर और एसपी को करते हुए बताया कि  रीठी तहसील के ग्राम पंचायत बिलहरी में खनन माफिया ने सार्वजनिक मुक्तिधाम (शमशान घाट) को भी नहीं बख्शा। मिट्टी खोद कर बेच दिया गया, जिसके चक्कर में जमीन में दफन शवों के कंकाल बाहर निकलकर इधर-उधर बिखर रहे हैं, लेकिन प्रशासन मौन साधे बैठा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले तहसीलदार से भी शिकायत की गई थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मुक्तिधाम की अस्मत पर प्रहार, बिखरी अस्थियां

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया शर्मा के द्वारा शासकीय भूमि और मुक्तिधाम पर जेसीबी चलाकर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। आलम यह है कि खुदाई के दौरान पुरानी कब्रें और दफन किए गए शवों के कंकाल बाहर निकल आए हैं। आस्था के केंद्र और पूर्वजों की अंतिम विश्राम स्थली की इस दुर्दशा ने पूरे गांव में आक्रोश भर दिया है।

शासकीय भूमि पर कब्जा

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि हाई स्कूल और मिडिल स्कूल के ठीक पीछे स्थित खसरा नंबर 1316/1, 1316/2, 1323 और 1289 की करोड़ों की सरकारी जमीन को छलनी किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, माफिया अपनी निजी जमीन (खसरा 1322) की आड़ में पूरी सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक रास्तों को निगल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध खनन की जानकारी पंचायत सचिव, सरपंच से लेकर खनन विभाग तक को है। 23 जनवरी  को लिखित शिकायत के बावजूद आज तक न तो जेसीबी जब्त हुई और न ही ट्रालियों पर कार्रवाई हुई। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि “अफसर माफिया की जेब में हैं”, इसीलिए जानबूझकर इस गंभीर मामले में आंखें मूंद ली गई हैं।

आक्रोशित ग्रामीण का कहना था कि मुर्दों की खामोशी को माफिया का शोर कुचल रहा है। अगर एक हफ्ते में कार्रवाई नहीं हुई, तो हम चक्काजाम और उग्र आंदोलन करेंगे।

चेतावनी:जेसीबी और ट्रैक्टर मालिकों पर दर्ज हो एफआईआर

कलेक्टर की जनसुनवाई में अपनी गुहार लगाने पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि सात दिनों के भीतर जेसीबी और ट्रैक्टर मालिकों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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