करूर भगदड़ मामला : द्रमुक की याचिका पर न्यायालय का सुनवाई से इनकार

करूर भगदड़ मामला : द्रमुक की याचिका पर न्यायालय का सुनवाई से इनकार
Share this news

नयी दिल्ली, 07 जुलाई 2026 (भाषा)

उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिजनों से प्रस्तावित मुलाकात पर सवाल उठाने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को मंगलवार को फटकार लगाई और राज्य के मंत्रियों पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाने वाली उसकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

द्रमुक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने द्रमुक से पूछा कि अदालत कार्यपालिका के प्रमुख (मुख्यमंत्री) की यात्रा पर कैसे कोई नियम बना सकती है। द्रमुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार पेश हुए। पीठ ने उनसे पूछा कि भगदड़ पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात करना गवाहों को प्रभावित करना कैसे हुआ।

‘या तो अर्जी वापस लें या हम खारिज करेंगे

मुख्यमंत्री विजय का भगदड़ के पीड़ित परिवारों से 10 जुलाई को मुलाकात का कार्यक्रम है। पीठ ने कुमार से कहा कि द्रमुक चाहे तो अपनी याचिका वापस लेकर कानून के तहत किसी अन्य उपाय पर विचार कर सकता है, या अदालत इसे खारिज कर देगी। इसके बाद कुमार ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने याचिका को वापस लिया मानते हुए खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे आर. एस. भारती

द्रमुक सचिव आर. एस. भारती ने यह याचिका दायर कर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन तथा मामले के अन्य आरोपियों को इस प्रकरण पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक पीड़ित परिवारों से उनके संपर्क को विनियमित करने का अनुरोध किया था।

याचिका में क्या कहा गया ?

याचिका में उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया था, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री करूर जाकर मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी आदेश, अनुकंपा नियुक्तियां तथा अन्य सरकारी सहायता प्रदान करेंगे।

अन्य राष्ट्रीय खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

About Post Author


Share this news
Advertisements