नयी दिल्ली, 11 नवंबर 2025 (भाषा)
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निठारी हत्याकांड के एक मामले में सुरेन्द्र कोली की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली उसकी सुधारात्मक याचिका को स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया, जिससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। कोली निठारी हत्याकांड के अन्य मामलों में पहले ही बरी हो चुका है।
29 दिसंबर 2006 को हुआ था निठारी हत्याकांड का खुलासा
निठारी हत्याकांड का खुलासा 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के बाद हुआ था। कोली उस समय पंढेर की कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम कर रहा था। यह आदेश भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने पारित किया, जिन्होंने कोली की याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की थी।
न्यायलय ने किया कोली को बरी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘‘उपर्युक्त कारणों से सुधारात्मक याचिका स्वीकार की जाती है।’’ शीर्ष अदालत ने मामले में कोली को बरी कर दिया तथा उसे पहले सुनायी गयी सजा और जुर्माना रद्द कर दिया। पीठ ने कहा, ‘‘यदि किसी अन्य मामले या कार्यवाही में याचिकाकर्ता की आवश्यकता न हो तो उसे तत्काल रिहा कर दिया जाएगा।’’
क्या है मामला?
कोली को नोएडा के निठारी गांव में 15 वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था और फरवरी 2011 में उच्चतम न्यायालय ने उसकी सजा को बरकरार रखा था। उसकी पुनर्विचार याचिका 2014 में खारिज कर दी गयी थी। हालांकि, जनवरी 2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी दया याचिका पर निर्णय में अत्यधिक देरी के कारण मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2023 में कोली और सह-अभियुक्त पंढेर को निठारी से जुड़े कई अन्य मामलों में बरी कर दिया था और 2017 में निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को पलट दिया। अदालत ने कोली को 12 मामलों और पंढेर को दो मामलों में बरी कर दिया था।
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