नयी दिल्ली, 01 जुलाई 2026 (भाषा)
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सांसद राघव चड्ढा को निशाना बनाने वाली कुछ आपत्तिजनक सोशल मीडिया सामग्री को हटाने का आदेश दिया।
क्या है मामला ?
आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए चड्ढा ने इससे पूर्व कथित तौर पर दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत सोशल मीडिया पोस्ट के प्रकाशन के खिलाफ उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। उन्होंने कहा था कि ये पोस्ट उनकी प्रतिष्ठा और उनके व्यक्तित्व के अधिकारों के लिए बेहद नुकसानदेह थीं।
हाई कोर्ट ने दिया क्या जवाब?
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले में अंतरिम आदेश सुनाते हुए कहा, ‘‘मैंने कहा कि इसमें व्यक्तित्व के अधिकार का मामला नहीं है। हालांकि, मैंने उन्हें (कुछ सामग्री को) हटाने के लिए कहा है।’’ न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वैसे सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक नहीं है।’’ आदेश की विस्तृत प्रति का इंतजार है। अदालत ने कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए अंतरिम राहत के पहलू पर फैसला 21 मई को सुरक्षित रख लिया था।
राघव चड्ढा की याचिका में क्या है ?
चड्ढा ने अपनी याचिका में सोशल मीडिया मंच पर बड़े पैमाने पर प्रसारित की जा रही गलत, एआई निर्मित और डीपफेक सामग्री को तुरंत हटाने का अनुरोध किया था। उनके मुकदमे में यह दलील दी गई थी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीपफेक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके अनधिकृत रूप से छेड़छाड़ कर सामग्री तैयार की गई थी और इसे प्रसारित किया जा रहा था, जो चड्ढा के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
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