बेंगलुरु, 22 दिसंबर 2025 (भाषा)
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को ‘मनरेगा’ के स्थान पर लाए गए केंद्र सरकार के ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम, 2025 की कड़ी आलोचना की और दावा किया कि नए कानून में किए गए बदलाव पिछले अधिनियम के मूल वादे को कमजोर एवं निष्प्रभावी बनाते हैं।
प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह अधिनियम धीरे-धीरे इस योजना को मांग-आधारित कानूनी अधिकार से आपूर्ति-आधारित व्यवस्था में बदलकर इसे अव्यवहारिक बना देगा, जिससे नागरिकों को काम की मांग करने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यद्यपि केंद्र के पास अधिकांश निर्णय लेने की शक्तियां रहेंगी लेकिन राज्यों को वित्तीय और प्रशासनिक बोझ का बड़ा हिस्सा वहन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘वीबी-जी राम जी विधेयक के बारे में बहुत कुछ कहा गया है लेकिन इन सब बातों से परे ये बदलाव धीरे-धीरे इस योजना को अव्यवहारिक बना देंगे और अंततः अधिकार-आधारित ग्रामीण रोजगार गारंटी के विचार को ही खत्म कर देंगे।’’
ग्रामीण विकास, पंचायत राज और सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार संभालने वाले मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित बदलाव राजकोषीय संघवाद को कमजोर करने के समान हैं, विशेष रूप से ऐसे समय में जब राज्य पहले से ही घटते वित्तीय संसाधनों का सामना कर रहे हैं।
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