भोपाल, 04 अगस्त 2026 (भाषा)
मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में छह बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को उम्मीदवार बनाने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का फैसला सफल नहीं रहा।
6,016 वोटों से हराया आशुतोष तिवारी को
कांग्रेस ने यह सीट बरकरार रखी, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल ने केंद्रीय नेतृत्व के फैसले की अवहेलना करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए। उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सोमवार को भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया।
भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 30 जुलाई को हुए इस उपचुनाव में भाजपा की हार केवल एक विधानसभा सीट का नुकसान नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी बड़ा झटका है।
दतिया में टिकट बदलाव बना हार की वजह
भाजपा ने दतिया सीट से मिश्रा की जगह तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। मिश्रा के टिकट नहीं मिलने के फैसले के बाद उनके गृह जिले में विरोध प्रदर्शन हुए थे। मिश्रा अपने लंबे राजनीतिक करियर में डबरा (ग्वालियर) से तीन और दतिया से तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। मिश्रा के सैकड़ों समर्थकों ने 10 और 11 जुलाई को दतिया में एक प्रमुख राजमार्ग को 12 घंटे से अधिक समय तक अवरुद्ध किया था।
पथराव और झड़प में एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल
इस दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश में यह लंबे समय बाद पहला मौका था जब केंद्रीय नेतृत्व के उम्मीदवार चयन के खिलाफ खुला विरोध देखने को मिला।
मिश्रा ने समर्थकों से की पार्टी प्रत्याशी के समर्थन की अपील
राज्य इकाई ने मिश्रा का नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था, लेकिन आंतरिक सर्वेक्षण और फीडबैक के आधार पर तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया। मिश्रा के समर्थक इस फैसले से नाराज थे क्योंकि वह कई सप्ताह से क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे और दतिया सीट से फिर उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, विरोध के बाद मिश्रा ने अपने समर्थकों से पार्टी के फैसले को स्वीकार करने और भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में काम करने की अपील की थी।
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