भोपाल, 05 अगस्त 2026 (भाषा)
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा को लंदन के एक संग्रहालय से मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में वापस लाने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायाजय ने मई में फैसला सुनाया कि धार में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में प्रत्येक शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
प्रतिमा की वापसी कोहिनूर से भी ज्यादा महत्वपूर्ण
देवी सरस्वती की पूजा हिंदू ‘ज्ञान की देवी’ के रूप में करते हैं। मामले में फैसला आने के बाद हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के संग्रहालय से वापस लाना आवश्यक है और यह ‘कोहिनूर से भी अधिक महत्वपूर्ण’ है।
ब्रिटेन में धार से मूर्ति ले जाए जाने की बात स्वीकार
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि करीब एक वर्ष पहले मध्यप्रदेश के संस्कृति सचिव एस. शेखर शुक्ला ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा था और प्रतिमा को लंदन के संग्रहालय से वापस लाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि धार से मूर्ति लाए जाने की बात वहां (लंदन में) स्वीकार कर ली गई है, लेकिन इसकी वापसी भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पर निर्भर करेगी। अग्रवाल ने कहा, ‘‘प्रयास करना हमारे हाथ में है। हमारी ओर से प्रयासों में कोई कमी नहीं है। प्रतिमा की पहचान को लेकर भी कोई विवाद नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिमा चिह्नित है और जिस स्थान पर इसे रखा गया है, वहां भी यह स्वीकार किया गया है कि इसे धार से ले जाया गया था। अब यह केवल राजनयिक संबंधों और प्रयासों पर निर्भर करेगा कि हम कितने सफल होते हैं। हमारी ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।’’
हिंदू पक्ष को मिला पूजा का अधिकार
उच्च न्यायालय ने मई के अपने फैसले में कहा था कि परमार वंश के राजा भोज की विरासत से जुड़े इस स्थल पर हिंदू पूजा की परंपरा कभी बाधित नहीं हुई। अदालत ने परिसर में केवल हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग स्वीकार करते हुए एएसआई के सात अप्रैल, 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर पर फैसला सुनाया।
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