जबलपुर, 28 दिसंबर 2025 (भाषा)
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को प्रसव की अनुमति देते हुए कहा है कि उसकी सहमति के बिना गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार उठाएगी खर्चा
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने निर्देश दिया कि प्रसव से संबंधित समस्त खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। पीड़िता का प्रसव भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम की निगरानी में कराया जाएगा। अदालत ने 11 दिसंबर को पारित आदेश जिला अदालत द्वारा नाबालिग पीड़िता के गर्भपात के संबंध में उच्च न्यायालय को पत्र लिखे जाने के बाद आया। इसके बाद उच्च न्यायालय ने मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट तलब की थी। उच्च न्यायालय के फैसले की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई थी।
पीड़िता की उम्र 16 वर्ष 7 माह
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की आयु 16 वर्ष सात माह है तथा गर्भावधि 29 सप्ताह एक दिन की है, जो प्रसव के अनुमेय समय के अंतर्गत आती है। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़िता को गर्भपात कराने या नहीं कराने के विकल्पों के बारे में परामर्श दिया गया था, जिस पर उसने गर्भ जारी रखने की इच्छा जताई।
माता-पिता ने तोडा संबंध
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने बताया कि उसने अपने बच्चे के पिता (आरोपी) से विवाह कर लिया है और वह प्रसव कराना चाहती है। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़िता के माता-पिता उसकी इच्छा से विवाह करने के कारण उसे अपने साथ रखने को तैयार नहीं हैं।सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि माता-पिता ने बेटी से किसी भी प्रकार का संबंध न होने की बात कही है।
अदालत ने कहा कि पीड़िता की सहमति के बिना गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती और सीडब्ल्यूसी को निर्देश दिया कि उसे 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक अपनी देखरेख में रखा जाए तथा बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं।
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