KATNI : निर्माणी में निगमीकरण का विरोध, पुतला फूंका, इंटक-मजदूर संघ सहित अन्य यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन

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कटनी, दैनिक मध्यप्रदेश
आयुध निर्माणियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी केन्द्र सरकार द्वारा बरसों से की जा रही है। लेकिन श्रमिकों से जुड़े संगठनों के कड़़े विरोध के कारण इसे अमल में नहीं लाया जा सका है। वहीं सरकार के आयुध निर्माणियों के निगमीकरण करने के विरोध में श्रमिक संगठनों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। आज श्रमिक संगठनों ने अपने-अपने राष्ट्रिय फेडरेशन के आव्हान पर निगमीकरण का पुतला फूंका। बताया जाता है कि 20 अगस्त से नाराज संगठनों ने एक माह की हड़ताल का भी आव्हान किया है। वहीं निर्माणी प्रबंधन ने कर्मचारियों से हड़ताल में भाग न लेने की अपील की है।

 केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में स्थित आयुध निर्माणियों में पिछले कुछ वर्षों से आयी काम की कमी के कारण उत्पादन कम होने पर उन्हें निजी हाथों को सौंपने की योजना बनायी गयी है। योजना की जानकारी मिलते ही श्रमिक संगठनों द्वारा विरोध शुरू किया गया। आज इसी संदर्भ में दोपहर को निर्माणी प्रवेश द्वार के पास निगमीकरण के प्रतीक रूपी पुतले का दहन किया गया। इस मौके पर ए.आई.डी.ई.एफ,आई.एन.डी.डब्ल्यु.सी.एफ. व बी.पी.एम.एस. के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे। बाद में कर्मचारी नेताओं ने 20 अगस्त से 18 सितम्बर तक आवाहित एक माह की हड़़ताल का नोटिस सौंपा।

कर्मचारियों को चेताया

विदित हो कि आयुध निर्माणी बोर्ड, रक्षा मंत्रालय द्वारा कर्मचारियों के हड़ताल के आव्हान पर उन्हें सूचित किया है कि वे हड़ताल में भाग न लें क्योंकि उपरोक्त तारीखों में अनुपस्थिति अनाधिकृत मानी जायेगी साथ ही उन पर कार्यवाही भी की जा सकती है। मिली जानकारी के अनुसार संगठनों के आव्हान पर 20 अगस्त से प्रस्तावित हड़ताल को रोकने के लिये जारी निर्देश में कहा गया कि एफ.आर. 17/1 के अनुसार ऐसी अनुपस्थिति की अवधि में कोई भी वेतन भत्ता नहीं मिलेगा और कुछ घंटे की अनुपस्थिति भी पूरे दिन की अनुपस्थिति मानी जायेगी तथा संबंधित कर्मचारी की सेवा भंग ब्रेक इन सॢवस भी माना जा सकता है। 

खुफिया एजेंसी सक्रिय

सूत्रों के अनुसार कर्मचारी संगठनों के आव्हान पर प्रस्तावित हड़ताल को रोकने के लिये  खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गयी हैं और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार माधवनगर थाना पुलिस ने  भी विगत दिवस निर्माणी आकर कर्मचारी नेताओं के नाम पते नोट कर ले जा चुकी है। इससे कर्मचारियों में यह शंका पैदा हो गयी कि हड़ताल से पूर्व उनके नेताओं को नजरबंद भी किया जा सकता है। 

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