देहरादून, 17 सितंबर 2025 (भाषा)
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और राज्य के कई अन्य हिस्सों में सोमवार एवं मंगलवार की दरमियानी रात बादल फटने और भारी बारिश के कारण तबाही मच गयी। उफनती नदियों के कारण इमारतें, सड़कें और पुल बह गए, जिससे 15 लोगों की मौत हो गई, 16 लापता हो गए और इस पहाड़ी राज्य के विभिन्न स्थानों पर 900 लोग फंस गए।
देहरादून जिले में 13 मौते
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार कुल मौतों में से अकेले देहरादून जिले में 13 और नैनीताल एवं पिथौरागढ़ ज़िलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। राज्य की राजधानी के विभिन्न हिस्सों में सोलह लोग लापता बताए गए हैं।अधिकारियों ने बताया कि देहरादून में हुई 13 मौतों में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के आठ निवासी भी शामिल हैं। वे विकासनगर तहसील में टोंस नदी को ट्रैक्टर-ट्रॉली से पार कर रहे थे, जो पानी के तेज बहाव में बह गई। समूह के दो और लोग लापता हैं।
दो-दो लाख की वित्तीय सहायता की घोषणा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड में वर्षाजनित घटनाओं में तीन लोग घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
लापता लोगों की तलाश जारी
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने यहां बताया कि खराब मौसम के बीच लापता लोगों की तलाश जारी रही, जबकि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन कर्मियों ने फंसे हुए अधिकांश लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।इसमें कहा गया है कि विभिन्न स्थानों पर फंसे 900 लोगों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन कर्मियों द्वारा बचाया गया।
बारिश के बाद ज्यादातर नदियां उफान पर
बारिश के बाद ज्यादातर नदियां उफान पर हैं। तमसा नदी (जिसे टोंस नदी भी कहा जाता है) के पानी से उसके तट पर स्थित प्रसिद्ध टपकेश्वर मंदिर जलमग्न हो गया, जिससे उसके प्रवेश द्वार के पास स्थित विशाल हनुमान प्रतिमा कंधों तक डूब गई। मंदिर के पुजारी बिपिन जोशी ने बताया कि उन्होंने पिछले 25-30 सालों में नदी का पानी इतना ऊपर उठते नहीं देखा। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से सुबह के समय जब बाढ़ आई तो कुछ ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि मंदिर में रहने वाले पुजारी सुरक्षित हैं।
छात्रों को किया रेस्क्यू
सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि देहरादून के पौंधा क्षेत्र में देवभूमि संस्थान परिसर में जलभराव के कारण फंसे लगभग 400-500 छात्रों को एसडीआरएफ की टीम ने बचाया। देहरादून जिले में सड़कें टूट गईं और कई पुल बह गए।
मसूरी-देहरादून मार्ग बंद
देहरादून-मसूरी मार्ग भी कई स्थानों पर टूट गया, जिसके कारण पुलिस ने पर्यटकों और आगंतुकों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा के लिए जहां भी हों, वहीं रुक जाएं। टिहरी में जलभराव के कारण गीता भवन में लोग फंस गए थे, जिन्हें बाद में बचा लिया गया। नैनीताल में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से आए मलबे से एक सड़क अवरुद्ध हो गई।
धामी ने की एक बार फिर स्थिति की समीक्षा
धामी ने शाम को यहां राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में एक बार फिर स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों से राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चलाने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है; प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। लापता लोगों की तलाश जारी है और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। भोजन, पेयजल और दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति के साथ राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं।
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