नवा रायपुर, 01 नवंबर 2025 (भाषा)
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा है, आज पूरी दुनिया में कहीं भी कोई भी संकट आता है, कोई आपदा आती है तो भारत एक भरोसेमंद साथी के तौर पर मदद के लिए आगे आता है।
एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड को समाज के नाम किया समर्पित
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को नवा रायपुर में नवनिर्मित ब्रह्माकुमारी संस्थान का भव्य शांति शिखर रिट्रीट सेंटर ‘एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड’ को समाज के नाम समर्पित किया। उन्होंने इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वैश्विक शांति के मिशन में जितनी अहमियत विचारों की होती है उतनी ही बड़ी भूमिका व्यावहारिक नीतियों और प्रयासों की भी होती है। भारत इस दिशा में आज अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा है। आज पूरी दुनिया में कहीं भी कोई भी संकट आता है, कोई आपदा आती है तो भारत एक भरोसेमंद साथी के तौर पर मदद के लिए आगे आता है और तुरंत पहुंचता है।’’

भारत पूरे विश्व में प्रकृति संरक्षण की प्रमुख आवाज : मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत पूरे विश्व में प्रकृति संरक्षण की प्रमुख आवाज बना हुआ है। बहुत आवश्यक है कि हमें प्रकृति ने जो दिया है हम उसका संरक्षण करें, उसका संवर्धन करें और यह तभी होगा जब हम प्रकृति के साथ मिलकर जीना सीखेंगे।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हमारे शास्त्रों ने प्रजापिता ने यही सिखाया है। हम नदियों को मां मानते हैं, हम जल को देवता मानते हैं, हम पौधे में परमात्मा के दर्शन करते हैं। इसी भाव से प्रकृति और उसके संसाधनों का उपयोग करते हैं। प्रकृति से केवल लेने का भाव नहीं बल्कि उसे लौटने की सोच भी होनी चाहिए, आज यही जीवन जीने का तरीका दुनिया को सुरक्षित भविष्य का भरोसा देता है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अभी से भविष्य के प्रति अपनी इन जिम्मेदारियों को समझ भी रहा है और उन्हें निभा भी रहा है। ‘वन सन, वन वर्ड, वन ग्रिड’ जैसी भारत की पहल, ‘वन अर्थ-वन फैमिली-वन फ्यूचर’ जैसे भारत के दृष्टिकोण से आज दुनिया जुड़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने भू-राजनीतिक सीमा से अलग मानव मात्र के लिए ‘मिशन लाइफ’ भी शुरू किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘समाज को निरंतर सशक्त करने में ब्रह्मकुमारीज जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका है। मुझे विश्वास है शांति शिखर जैसे संस्थान भारत के प्रयासों को नयी ऊर्जा देंगे और इस संस्थान से निकली ऊर्जा देश और दुनिया के लाखों करोड़ों लोगों को विश्व शांति के विचार से जोड़ेगी।’’
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