छतरपुर (मध्यप्रदेश), 19 जुलाई 2026 (भाषा)
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस और प्रशासन ने रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटा दिया।
‘गिरफ्तारी नहीं, सुरक्षा कारणों से घर पहुँचाया’
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि प्रशासन ने इन आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से सभी को ‘प्रेम से व शांतिपूर्वक’ उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है।
बाढ़ की आशंका के बीच नदी किनारे प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधी सरकार और प्रशासन के वादे अब तक पूरे नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए तीन जुलाई को यह अनिश्चितकालीन अनशन कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे शरू किया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया ग्रामीण जिस जगह पर आंदोलन कर रहे थे, वहां पर पुल निर्माण का काम हो रहा है तथा बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ रहा था, जो कि कभी भी खतरा बन सकता था। उन्होंने कहा कि लोग काफी दिनों से भूख हड़ताल पर थे, इसलिए उनका स्वास्थ्य भी गिर रहा था और कुछ की तबियत भी बिगड़ रही थी।
गिरता स्वास्थ्य और बढ़ता पानी बना कार्रवाई की वजह
पटले ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की टीम चिकित्सकों के साथ यहां आई थी और सभी से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की गई। उन्होंने कहा, “बढ़ते पानी की वजह से यह जगह भी सुरक्षित नहीं थी, इसलिए प्रेम और शांतिपूर्ण तरीके से उन्हें हटाया गया और सुरक्षित भेज दिया गया।” उन्होंने कहा कि अमित भटनागर भी भूख हड़ताल पर थे और उनका स्वास्थ लगातार गिर रहा था इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।
‘गिरफ्तारी के बाद भी जारी है अनशन’
आंदोलनकारियों में शामिल उनकी एक अन्य प्रमुख नेता दिव्या अहिरवार ने कहा, “हमारा आंदोलन 3 जुलाई से लगातार अभी तक जारी है और भटनागर का आमरण अनशन भी जारी है।” उन्होंने कहा कि भटनागर आज केन-बेतवा में 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का मीडिया के समक्ष खुलासा करने वाले थे लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुबह 5 बजे ही हजारों की संख्या में भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को आंदोलन स्थल से गिरफ्तार कर लिया।
जल, चिता और फांसी सत्याग्रह से अनोखा विरोध
उन्होंने कहा, “अमित भटनागर को कुछ भी होता है और हमारे आंदोलनकारियों में से एक भी व्यक्ति को खरोंच भी आती है तो उसका जिम्मेदार प्रशासन होगा, स्वयं मुख्यमंत्री होंगे।” मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की भागीदारी वाले इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी किया।
सिंचाई और पेयजल संकट का स्थायी समाधान
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित कर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है।
विस्थापन और पन्ना टाइगर रिजर्व पर संकट
हालांकि, परियोजना से प्रभावित कुछ परिवारों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने विस्थापन, पुनर्वास तथा पन्ना बाघ अभयारण्य के हिस्सों सहित जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर इसका विरोध किया है। वर्तमान आंदोलन में रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं। उनका कहना है कि पुनर्वास को लेकर प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
रुनझ और मझगांव परियोजनाओं से जुड़े हैं प्रदर्शनकारी
छतरपुर जिला प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल 176 लोग पड़ोसी पन्ना जिले की रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित हैं तथा उनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजा प्रक्रिया से संबंध नहीं है। प्रशासन ने एक बयान में प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटकर वहां के जिला प्रशासन से पुनर्वास का लाभ लेने का आग्रह किया।
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