हाइलाइट्स
| 1. बांग्लादेश उच्चायोग के पास प्रदर्शन। 2. हिंदुओं के खिलाफ बर्बरता का विरोध। 3. सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग। |
नयी दिल्ली, 24 दिसंबर 2025 (भाषा)
बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की पीटकर हत्या किए जाने के खिलाफ मंगलवार को यहां भगवा झंडे लिए और नारे लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) एवं बजरंग दल के सैकड़ों समर्थकों ने कड़ी सुरक्षा से लैस बांग्लादेश उच्चायोग के पास अवरोधक हटा दिए, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई।
40 प्रदर्शनकारियों को लिया हिरासत में
पुलिस के अनुसार, जब पुलिस भीड़ को काबू करने की कोशिश कर रही थी तो उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को हटाकर इधर-उधर कर दिया। कम से कम 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘हालात पर काबू पा लिया गया। एहतियात के तौर पर करीब 40 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।’’
प्रदर्शन से पहले 1,500 पुलिसकर्मी तैनात
दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा घोषित प्रदर्शन से पहले सुबह उच्च सुरक्षा वाले इस इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी।इलाके में सात स्तर पर अवरोधक लगाए गए तथा पुलिस एवं अर्धसैनिक बल की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया।इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन से पहले 1,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को उच्चायोग से लगभग 800 मीटर की दूरी पर रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को उच्चायोग तक पहुंचने से रोकने के लिए डीटीसी की बसों को अवरोध के तौर पर लगाया गया था।

इस दौरान प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लहरा रहे थे जिन पर बांग्लादेश सरकार के खिलाफ निंदा भरे संदेश लिखे थे। इनमें से एक तख्ती पर लिखा था, ‘‘हिंदू रक्त की एक-एक बूंद का हिसाब चाहिए।’’
क्या है पूरा मामला?
बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कपड़ा फैक्टरी के श्रमिक दीपू चंद्र दास (25) को मैमनसिंह के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीटकर मार डाला और उसके शव को आग लगा दी। पुलिस के मुताबिक, दास को पहले फैक्टरी के बाहर भीड़ ने पीटा और फिर एक पेड़ से लटका दिया तथा उसके शव को आग के हवाले कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की मांग : जिम्मेदार लोगों के खिलाफ करे सख्त कार्रवाई
इस संबंध में एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘एक हिंदू पर बेरहमी से हमला किया गया और उसे मार डाला गया। हम अपनी सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस हत्या के पीछे जो लोग हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। हम यह भी मांग करते हैं कि बांग्लादेश पुलिस इस हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।’’

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘हम भारत में हर समुदाय को अपना भाई-बहन मानते हैं।’’ गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के अधिकारियों पर अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया और पड़ोसी देश में रहने वाले हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत से कड़े राजनयिक कदम उठाने की मांग की।
यह आंदोलन सिर्फ़ एक दिन तक सीमित नहीं : प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जब बांग्लादेश में लोग जिहादी सोच रखते हैं तो कोई क्या कर सकता है। विहिप और बजरंग दल का हर कार्यकर्ता बांग्लादेश में हिंदू परिवारों के समर्थन में खड़ा है। हम सभी रुकावटों को पार करेंगे और बांग्लादेश उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे।’’ कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि यह आंदोलन सिर्फ़ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा और मांगें पूरी नहीं होने पर इसे तेज किया जाएगा।
सुमित कश्यप ने किया हिंदू एकता का आह्वान
प्रदर्शनकारी सुमित कश्यप ने हिंदू एकता का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘हिंदू एकता ज़रूरी है। अनेक बांग्लादेशी राष्ट्रीय राजधानी में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे हैं। आज तक किसी एक भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। हर भारतीय शांति पसंद करता है और शांति से रहता है। लेकिन बांग्लादेश में लोग अब हमारे भाइयों को मार रहे हैं।’’

वहीं, प्रदर्शन में शामिल सतीश गुप्ता नाम के व्यक्ति ने कहा कि वे ‘‘आतंकवादी मानसिकता’’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘हमें पता है कि अनेक बांग्लादेशी लोग हमारे देश में छिपकर अलग-अलग घरों में काम कर रहे हैं। क्या किसी एक भी व्यक्ति को कोई समस्या हुई है? हम बांग्लादेश में किसी भी भारतीय के साथ अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
हनुमान चालीसा का पाठ करते दिखे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी हनुमान चालीसा का पाठ करते और धार्मिक नारे लगाते दिखे। पुलिस ने उनसे बार-बार शांति बनाए रखने और अवरोधक तोड़ने की कोशिश न करने की अपील की। प्रदर्शनकारियों के पुलिस घेरे को तोड़ने की कोशिश करने पर मामूली झड़पें हुईं।
विहिप के एक नेता ने कहा, ‘‘हम हर हिंदू की उचित सुरक्षा, हिंदू परिवारों को मुआवज़ा, और जिन परिवारों को खुलेआम लूटा गया, उनके लिए उचित पुनर्वास की मांग करते हैं।’’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह विरोध शांतिपूर्ण और कानूनी है।
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