होल्डिंग सेंटर में रखकर की गई विस्तृत पूछताछ फिर पश्चिम बंगाल के सीमानगर पोस्ट, जिला नदिया स्थित 32वीं बीएसएफ बटालियन के माध्यम बांग्लादेश सेना को किया गया सुपुर्द
कटनी, 03 अगस्त 2025 (दैमप्र)
अच्छी कमाई की लालच में बांग्लादेश से भारत पहुंचे दो अवैध बांग्लादेशी नाबालिग बालकों में एक कटनी स्टेशन से भीग मांगते पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे होल्डिंग सेंटर में रखकर विस्तृत पूंछताछ की तो संदिग्ध बालक स्वयं को गाजीपुर, ढाका (बांग्लादेश) का निवासी बताया।इसकी सूचना पुलिस मुख्यालय भोपाल एवं भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को प्रेषित कर डिपोर्ट की कार्यवाही प्रारंभ की गई।
गेट फांदकर आए भारत, कटनी रेलवे स्टेशन में मांग रहे थे भीख
बताया जाता है कि दो नाबालिग भारत-बाग्लादेश बार्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को चकमा देकर गेट फांदकर भारत आ गए। एक नाबालिग वापस लौट गया तो दूसरे पिछले एक वर्ष से ही भारत में रह गया। सर्चिंग के बीच कटनी पुलिस ने बांग्लादेशी नाबालिग को कटनी रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया। कटनी पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में नाबालिग ने वह गाजीपुर ढाका(बांग्लादेश) निवासी है। उसके पिता लॉरी ड्राइवर है। एक्सीडेंट हो जाने के कारण उसके घर में पैसों की तंंगी थी। इस दौरान घर के पास रहने वाले उसके दोस्त से संपर्क हुआ तो उसने कहा कि तुझे भारत चलना पड़ेगा वहीं 40 हजार रुपए मिलेंगे। उसका दोस्त पहले भी भारत आ चुका था। इसके बाद दोनों बांग्लादेश के जायदेवपुर स्टेशन पहुंचे और यहां से ट्रेन में बैठकर चापई नवाबगंज स्टेशन आ गए। पटरी के किनारे-किनारे चलकर बार्डर तक पहुंचे। यहां बार्डर पर बांग्लादेश का मिलिट्री वाला मिला तो पूछने पर नाबालिगों ने बता दिया कि मामा से मिलने जा रहे हैं। इसके बाद दोनों लोहे का गेट को पार करके भारत की सीमा में प्रवेश कर गए। यहां मिलिट्री कैंप से छिपकर खंडहर मकान में रात काटी और इसके बाद आगे बढ़ गए। ट्रेन का टिकट लेकर कलकत्ता पहुंचे तो यहां दोनों नाबालिगों की आपस में लड़ाई हो गई। इसके बाद एक नाबालिग वापस लौट गया तो दूसरा कलकत्ता में ही होटल में काम करने लगा। करीब 9 महीने तक यहां काम करने के बाद वह वापस लौटने के लिए निकला लेकिन भोपाल और भोपाल से कटनी स्टेशन पहुंच गया।
कटनी पुलिस ने बोर्डर पर बीएसएफ को सौंपा
पुलिस की सर्चिंग के दौरान हिरासत में लिए गए नाबालिग को होल्डिंग सेंटर में रखा। बता दें कि कटनी पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार सर्चिंग व सत्यापन कार्य किया गया।सर्चिंग के दौरान 8 जुलाई 2025 को कटनी रेलवे स्टेशन क्षेत्र से एक संदिग्ध बांग्लादेशी नाबालिग को पकड़ा गया। बांग्लादेशी नाबालिग पिछले एक माह से कटनी रेलवे स्टेशन में ही रह रहा था। रात में भी वह कटनी रेलवे स्टेशन में ही सो जाता था।

पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया के मार्गदर्शन में एक विशेष कार्यबल का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व निरीक्षक आशीष कुमार शर्मा द्वारा किया गया। टीम में सायबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक रूपेन्द्र सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक प्रशांत विश्वकर्मा, आरक्षक आरिफ हुसैन, मंसूर हुसैन एवं अजय शंकर साकेत को सम्मिलित किया गया। पुलिस मुख्यालय भोपाल एवं विदेश मंत्रालय भारत सरकार को सूचित कर डिपोर्ट की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। भारत सरकार एवं पुलिस मुख्यालय से आवश्यक निर्देश प्राप्त होने के उपरांत पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार एक विशेष टीम का गठन किया गया। सायबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक रूपेन्द्र सिंह राजपूत के नेतृत्व में आरक्षक अमित श्रीपाल एवं अमित सिंह के साथ मिलकर बांग्लादेशी नाबालिग को पश्चिम बंगाल के सीमानगर पोस्ट, जिला नदिया स्थित 32वीं बीएसएफ को सौंपा, जहां से उसे बांग्लादेश सरकार की सेना के सुपुर्द किया गया।
सीमा पार करना अपराध
बांग्लादेश बॉर्डर से कूदकर भारत आने का मतलब अवैध रूप से सीमा पार करना है, जिसे ‘घुसपैठ’ कहा जाता है। यह एक गंभीर अपराध है। भारत और बांग्लादेश के बीच 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे ‘ऑपरेशन जीरो लाइंस’ के नाम से जाना जाता है। यह दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी स्थलीय सीमा है। सीमा पर सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल तैनात है, जो अवैध गतिविधियों, जैसे तस्करी और घुसपैठ को रोकने के लिए काम करती है। घुसपैठ और तस्करी दोनों ही भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव का कारण बनते हैं।
इनकी रही अहम भूमिका
इस समग्र अभियान में पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के कुशल नेतृत्व एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया के मार्गदर्शन में गठित विशेष कार्यबल ने अत्यंत समर्पण, सतर्कता एवं अनुशासन के साथ कार्य करते हुए उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। उनकी रणनीतिक योजना और टीम भावना के परिणामस्वरूप यह संवेदनशील अभियान पूर्णतः सफल हो सका। उक्त मामले में निरीक्षक आशीष कुमार शर्मा, उनि. रूपेन्द्र राजपूत, प्र.आर. आरिफ हुसैन, प्रशांत विश्वकर्मा, मंसूर हुसैन, अजय साकेत, सतेन्द्र सिंह राजपूत, अमित श्रीपाल, चंदन प्रजापति, शुभम गौतम, एवं अमित सिंह ने समर्पित कार्य करते हुए अभियान को सफलता की ओर पहुँचाया।
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