नयी दिल्ली, 04 जनवरी 2026 (भाषा)
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और विभिन्न पशु संरक्षण समूहों के स्वयंसेवियों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्र होकर उच्चतम न्यायालय से सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने हाल के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की।
पशु प्रेमियों के हंगामे को करें अनसुना
आयोजकों ने बताया कि अगले सप्ताह उच्चतम न्यायालय में इस मामले की सुनवाई से पहले आयोजित प्रदर्शन में लगभग 30 प्रतिभागियों ने अपनी चिंताओं को उजागर करने के लिए रचनात्मक दृश्यों वाले पोस्टर पकड़े हुए थे। प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने स्कूलों, अस्पतालों और परिवहन केंद्रों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश को ‘‘अव्यावहारिक’’ और ‘‘अमानवीय’’ बताया।
कुत्तों को न हो कोई दिक्कत
उच्चतम न्यायालय ने सात नवंबर, 2025 को शैक्षणिक केंद्रों, अस्पतालों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं में ‘‘खतरनाक वृद्धि’’ का संज्ञान लिया था और प्राधिकारियों को ऐसे कुत्तों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में ले जाने का निर्देश दिया था। एक पशु अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘पहले भी आवारा कुत्तों को हटाने या दूसरी जगह ले जाने के प्रयास किये गये थे, लेकिन ये असफल रहे, क्योंकि खाली जगहों पर जल्द ही बिना टीकाकरण और नसबंदी वाले कुत्ते आ गए, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं फिर से पैदा हो गईं।’’
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, जो नसबंदी और टीकाकरण पर केंद्रित हैं, आवारा कुत्तों की आबादी को दीर्घकालिक रूप से प्रबंधित करने का एकमात्र वैध और टिकाऊ तरीका है।
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