गंगटोक, छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, बहुप्रतीक्षित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: एक बार फिर आरंभ हो गई है। शुक्रवार को सिक्किम स्थित नाथूला दर्रे से 33 तीर्थयात्रियों और दो समन्वय अधिकारियों का पहला जत्था विधिवत रूप से रवाना हुआ।
इस ऐतिहासिक पल को चिह्नित करने के लिए पूर्वी सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया, जहां सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। यह आयोजन विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में हुआ।
पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सी. एस. राव ने राज्य सरकार और सिक्किमवासियों की ओर से तीर्थयात्रियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि पहले जत्थे में 33 तीर्थयात्रियों के साथ दो समन्वय अधिकारी शामिल हैं — एक विदेश मंत्रालय से और दूसरा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) से।
राव ने यह भी आश्वासन दिया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों और अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर पूरी तैयारी की है।
राज्यपाल माथुर ने अपने संबोधन में कहा, “केंद्र सरकार के सतत प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के चलते यह यात्रा एक बार फिर संभव हो पाई है। यह सिर्फ एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और कूटनीतिक सहयोग का प्रतीक है।”
इस वर्ष कुल 750 भारतीय तीर्थयात्रियों का चयन कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किया गया है। इनमें से 500 श्रद्धालु नाथूला दर्रे के रास्ते 10 समूहों में यात्रा करेंगे, जबकि 250 तीर्थयात्री उत्तराखंड स्थित लिपुलेख दर्रे से अपने पवित्र गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य:
- यात्रा छह साल बाद दोबारा शुरू हुई है।
- पहला जत्था नाथूला दर्रे से रवाना हुआ।
- कुल 750 भारतीयों को मिला अवसर।
- सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।

