मप्र उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के दोषी की मौत की सजा को बदला, अब भुगतने होंगे 25 साल सश्रम कारावास

पॉक्सो मामले में सजा संशोधन का प्रतीकात्मक चित्र
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जबलपुर, 21 जून 2025 — मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी युवक की मौत की सजा को 25 वर्ष के सश्रम कारावास में बदलने का आदेश दिया है। अदालत ने यह निर्णय दोषी की सामाजिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए सुनाया।

न्यायालय का दृष्टिकोण: अपराध गंभीर, लेकिन परिस्थितियाँ अलग

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यद्यपि यह कृत्य “क्रूर और अमानवीय” था, लेकिन दोषी युवक 20 वर्षीय, अशिक्षित और आदिवासी समुदाय से है, जिसने कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया।

“उसके माता-पिता ने कभी शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया और उचित देखभाल के अभाव में वह घर छोड़कर एक ढाबे में काम कर रहा था, जहाँ का माहौल अच्छे विकास के लिए उपयुक्त नहीं था।”

दोष साबित, पर पुनर्विचार का आधार मिला

अदालत ने यह स्वीकार किया कि आरोपी ने बच्ची से दुष्कर्म किया और फिर उसका गला घोंटने की कोशिश कर उसे मरने के लिए छोड़ दिया। इसके बावजूद, आरोपी की पारिवारिक पृष्ठभूमि, आयु, और शिक्षा की कमी को ध्यान में रखते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दी गई मौत की सजा को कम किया गया।

अब आरोपी को 25 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा और ₹10,000 का जुर्माना भी अदा करना होगा।

पृष्ठभूमि: पॉक्सो अदालत का पहले का निर्णय

यह मामला खंडवा जिले का है, जहाँ की पॉक्सो अदालत ने 21 अप्रैल 2023 को दोषी को मौत की सजा सुनाई थी। अभियोजन के अनुसार, 30-31 अक्टूबर 2022 की रात आरोपी ने बच्ची को उसकी झोपड़ी से अगवा कर उससे दुष्कर्म किया था। पीड़िता को बाद में बेहोशी की हालत में बरामद किया गया।


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