अफ्रीका से लाए जा रहे आठ और चीते शनिवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचेंगे

अफ्रीका से लाए जा रहे आठ और चीते शनिवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचेंगे
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श्योपुर (मप्र), 27 फरवरी 2026 (भाषा)

अफ्रीका से लाए जा रहे आठ और चीते शनिवार सुबह मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भारत में जारी चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इन चीतों को केएनपी में तैयार किए गए बाड़ों में छोड़ेंगे।

इस दल में छह मादा और दो नर चीते

चीता परियोजना के निदेशक उत्तम शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बोत्सवाना से आने वाले इस दल में छह मादा और दो नर चीते शामिल हैं। इन्हें लेकर भारतीय वायुसेना का विमान रात नौ से दस बजे के बीच ग्वालियर पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि ग्वालियर से दो वायुसेना हेलीकॉप्टरों के जरिए चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया जाएगा। ग्वालियर में उनके शनिवार सुबह नौ से दस बजे के बीच पहुंचने की संभावना है। बोत्सवाना से ग्वालियर तक उड़ान की अवधि लगभग नौ से 10 घंटे होगी।

देश में चीतों की संख्या बढ़कर 46

यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा समूह होगा। इससे पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाया जा चुका है। इस नए दल के आगमन के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी। शर्मा ने कहा कि केएनपी में विशेष बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीतों को लगभग एक माह तक पृथकवास में रखा जाएगा। हेलीकॉटरों के सुरक्षित उतरने के लिए पार्क में पांच हेलीपैड भी बनाए गए हैं।

आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य

उन्होंने कहा कि वायुसेना ने फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाने में सहयोग किया था और इस बार भी वही व्यवस्था की गई है। इससे पहले सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते एक निजी विमान से ग्वालियर लाए गए थे, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर से कूनो पहुंचाया गया था। शर्मा ने कहा, “अधिक चीतों के आगमन से भारत का चीता पुनर्वास कार्यक्रम मजबूत होगा। केंद्र सरकार के सहयोग से हम जल्द से जल्द इनकी संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।”

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में 35 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हैं, जबकि तीन को मंदसौर जिले स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि किसी एक ही आवास में लुप्तप्राय प्रजाति को रखने से बीमारी फैलने का खतरा रहता है, जिससे पूरी आबादी प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है।

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