इंदौर में पुलिस कर्मी के थप्पड़ मारने के बाद 22 वर्षीय युवक ने पांचवीं मंजिल से कूदकर दी जान

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इंदौर (मध्यप्रदेश), 06 मार्च 2026 (भाषा)

इंदौर में 22 वर्षीय एक युवक ने बृहस्पतिवार तड़के एक रिहायशी इमारत की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। युवक के परिजनों का कहना है कि एक पुलिस कर्मी द्वारा कथित रूप से थप्पड़ मारे जाने के बाद उसने डर के मारे जान देने का यह कदम उठाया, जबकि पुलिस ने इस आरोप को खारिज किया है।

पांचवीं मंजिल से लगा दी छलांग

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चंदन नगर थानाक्षेत्र के ताप्ती परिसर में राज मकवाना (22) ने इस रिहायशी इमारत की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी और नीचे गिरने के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि रिहायशी इमारत के एक सुरक्षा गार्ड ने पुलिस को सूचना दी थी कि मकवाना उससे विवाद कर रहा है।

पुलिसकर्मी ने जड़ दिया था थप्पड़

मकवाना की बड़ी बहन निकिता ने संवाददाताओं को बताया कि बुधवार देर रात घर में असहज महसूस करने पर उनका भाई बाहर खुली हवा में टहलने निकला था। उन्होंने बताया, ‘‘सुरक्षा गार्ड की सूचना पर मौके पर पहुंचे पुलिस कर्मियों ने मेरे भाई से पूछताछ की। मेरे भाई ने ‘सॉरी’ बोलकर पुलिस से माफी भी मांगी। इसके बावजूद एक पुलिस कर्मी ने उसे थप्पड़ मार दिया।’’

डर गया था भाई

निकिता ने बताया कि आत्महत्या से पहले मकवाना ने परिजनों से कहा था कि उसे इस बात का डर सता रहा है कि कहीं पुलिस उसे अपने साथ तो नहीं ले जाएगी।

हंगामे की सूचना पर पहुंची थी पुलिस

चंदन नगर के थाना प्रभारी तिलक कारोले ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘रिहायशी इमारत के परिसर में मकवाना के हंगामे की सूचना पर पुलिस की गाड़ी मौके पर पहुंची थी। पुलिसकर्मियों ने उसे समझा-बुझाकर शांत रहने को कहा था। इसके 45 मिनट बाद उसने इमारत की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी।’’

थप्पड़ मारने के आरोपों को किया खारिज

कारोले ने मकवाना की बहन के इस आरोप को खारिज किया कि एक पुलिस कर्मी ने उसे चांटा मारा था। थाना प्रभारी ने कहा,‘‘पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मकवाना के साथ मारपीट की बात सामने नहीं आई है। हम उसकी मौत के मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कदम उठाये जाएंगे।’’

मनोचिकित्सक के पास चल रहा था इलाज

उन्होंने कहा कि मकवाना का एक मनोचिकित्सक के जरिये पिछले दो साल से इलाज चल रहा था और उसके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 324 (खतरनाक साधनों का उपयोग करके किसी व्यक्ति को जान-बूझकर चोट पहुंचाना) के तहत एक पुराना प्रकरण भी दर्ज है।

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