प्रयागराज, 17 अक्टूबर 2025 (भाषा)
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को लंबित आवेदनों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा और सुनवाई की अगली तिथि सात नवंबर निर्धारित की है।
अविनाश सक्सेना ने सुनी वकीलों की दलीलें
न्यायमूर्ति अविनाश सक्सेना ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद यह तिथि तय की। चूंकि कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले की पहले सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में बैठ रहे हैं, अतः यह मामला अब न्यायमूर्ति अविनाश सक्सेना को सौंपा गया है।
अर्जी में क्या कहा?
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति सक्सेना ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को लंबित आवेदनों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही, जिन मामलों में अब तक लिखित जवाब दाखिल नहीं किए गए हैं, उनमें शीघ्र जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
18 वाद (मुकदमे) दायर
हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाने, भूमि पर पुनः स्वामित्व प्राप्त करने तथा मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर 18 वाद (मुकदमे) दायर किए हैं। इससे पूर्व, एक अगस्त 2024 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिंदू पक्षों द्वारा दाखिल इन मुकदमों की पोषणीयता (सुनवाई योग्य होने) को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि ये मुकदमे न तो समयसीमा, न ही वक्फ अधिनियम, और न ही पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं। पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्वरूप विद्यमान था, उसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
यह विवाद मथुरा में मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसे भगवान कृष्ण के जन्म स्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है।
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