बंगाल में नयी सरकार का शपथग्रहण नौ मई को; मोदी, शाह के शामिल होने की संभावना

बंगाल में नयी सरकार का शपथग्रहण नौ मई को; मोदी, शाह के शामिल होने की संभावना
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कोलकाता, 07 मई 2026 (भाषा)

पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली नयी सरकार का शपथग्रहण समारोह नौ मई को यहां ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा, जो दशकों तक राजनीतिक हाशिये पर रहने के बाद राज्य में भगवा खेमे के सत्ता में आने का प्रतीक होगा।

कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, हालांकि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अब भी रहस्य बना हुआ है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को इस पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता के नाम भी इस दौड़ में शामिल हैं।

समारोह में कई वरिष्ठ नेता होंगे शामिल

शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा तथा राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि केंद्रीय आलाकमान सरकार का नेतृत्व करने के लिए बंगाल की भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़े एक ‘‘भूमिपुत्र’’ चेहरे को लाना चाहता है।

शुक्रवार को होगा नए मुख्यमंत्री का फैसला

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को घोषणा की, ‘‘नयी भाजपा सरकार 9 मई को सुबह 10 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेगी।’’ अधिकारी ने नंदीग्राम में हनुमान जी की पूजा-अर्चना की और राज्य में सत्ता में आने के लिए पार्टी के लंबे संघर्ष के दौरान राजनीतिक हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस तरह से काम करेंगे कि बंगाल में भाजपा सरकार 100 साल तक बनी रहे।’’ अधिकारी ने उम्मीद जताई कि आने वाले चुनावों में भाजपा का ‘वोट शेयर’ मौजूदा 46 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा।

बैसाख महीने के 25वें दिन शपथग्रहण समारोह

खास बात यह है कि शपथग्रहण समारोह बंगाली पंचांग के बैसाख महीने के 25वें दिन आयोजित किया जाएगा जिसे पूरे राज्य में रवींद्र जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता की झलक नजर आएगी। राजनीतिक हलकों में इस तारीख के चयन को भाजपा द्वारा बंगाल की सांस्कृतिक परिकल्पना में अपने ऐतिहासिक उदय को स्थापित किए जाने और अपनी पहचान से संबंधित आरोपों का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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