वैश्विक कल्याण के लिए एक बड़ी ताकत बना हुआ है ब्रिक्स: प्रधानमंत्री मोदी

वैश्विक कल्याण के लिए एक बड़ी ताकत बना हुआ है ब्रिक्स: प्रधानमंत्री मोदी
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मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा : ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर दोहरे मानदंडों का हुआ है शिकार

रियो डी जेनेरियो, 7 जुलाई 2025 (भाषा)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स आर्थिक सहयोग और वैश्विक कल्याण के लिए एक बड़ी ताकत बना हुआ है। ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों के कई शीर्ष नेता शिखर सम्मलेन के लिए ब्राजील के इस समुद्र तटीय शहर रियो डी जेनेरियो में एकत्र हुए हैं।

सम्मेलन का आयोजन समूह के वर्तमान अध्यक्ष ब्राजील ने किया है।

मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार किया गया, जिसके तहत मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को समूह में शामिल किया गया। इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स में शामिल हुआ।


चौथे चरण में ब्रिक्स पहुचें : प्रधानमंत्री मोदी

मोदी पांच देशों के दौरे के चौथे चरण में कल रात यहां पहुंचे थे। इससे पहले वह घाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और अर्जेंटीना का दौरा कर चुके हैं।

ब्राजील के राष्ट्रपति की ओर से शिखर सम्मेलन स्थल पर स्वागत किए जाने के बाद मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “रियो डी जेनेरियो में इस वर्ष के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रपति लूला का आभारी हूं।

भारत अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।


‘ग्लोबल साउथ’ ‘‘दोहरे मानदंडों’’ का शिकार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर ‘‘दोहरे मानदंडों’’ का शिकार हुआ है और विश्व अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देने वाले राष्ट्रों को निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं मिल पाती है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद(यूएनएससी) सहित प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार पर भी जोर दिया।

वैश्विक आबादी की दो तिहाई आबादी है ग्लोबल साउथ

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि 20वीं सदी में गठित वैश्विक संस्थाओं में विश्व की आबादी के दो-तिहाई हिस्से को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के बिना ये संस्थाएं ऐसे मोबाइल फोन की तरह लगती हैं, जिनके अंदर ‘सिम कार्ड’ तो लगा हुआ है लेकिन नेटवर्क नहीं है।


निर्णय लेने वाले मंच को नहीं दी जगह

पहले पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि जलवायु वित्त, सतत विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुंच जैसे मुद्दों पर ‘ग्लोबल साउथ’ को अक्सर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में जिन देशों का बड़ा योगदान है, उन्हें निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं दी गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का भी सवाल है।’’

दुनिया को एक नयी बहुध्रुवीय व्यवस्था की जरूरत

मोदी ने कहा कि आज दुनिया को एक नयी बहुध्रुवीय और समावेशी व्यवस्था की जरूरत है और इसकी शुरुआत वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधारों से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘सुधार केवल प्रतीकात्मक नहीं होने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक प्रभाव भी दिखना चाहिए। शासन व्यवस्था, मताधिकार और नेतृत्व के पदों में बदलाव होना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि नीति-निर्माण में ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की चुनौतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि यह एक ऐसा संगठन है जो समय के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता रखता है।

मोदी ने कहा, ‘‘21वीं सदी के सॉफ्टवेयर को 20वीं सदी के टाइपराइटर से नहीं चलाया जा सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हमेशा अपने हितों से ऊपर उठकर मानव जाति के हित में काम करना अपना कर्तव्य माना है।’

मोदी ने कहा, ‘‘हम ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर सभी विषयों पर रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’’

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