बहोरीबंद , 21 जून 2025: मानसून की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। गांवों के कुओं और नलों में नहीं डाली जा रही दवा, दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ा गया है।
पंचायत स्तर पर नहीं कोई जांच व्यवस्था
ग्रामीण अब भी कुएं और हैंडपंपों के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन जब तक किसी गांव में बीमारी नहीं फैलती, तब तक पीएचई विभाग द्वारा सैम्पल नहीं लिए जाते। पंचायत स्तर पर पानी की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे संभावित बीमारी का समय रहते पता नहीं चल पाता।
फ्लोराइड स्तर पर नहीं है नजर
हैंडपंपों में बढ़ते फ्लोराइड स्तर से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। अधिक फ्लोराइड होने पर नलकूप बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन जांच की अनुपस्थिति में ग्रामीण अज्ञात रूप से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
पीएचई की दवा सिर्फ हैंडपंपों तक
पीएचई विभाग समय-समय पर हैंडपंपों में हाइपोक्लोराइट दवा डालता है, लेकिन पंचायतें कुओं में दवा नहीं डालतीं। इससे बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
उपयंत्री अनिल चुमल्के के अनुसार,
“प्री-मानसून के तहत जल्द ही दवा डालने का काम शुरू होगा और पानी के सैम्पल लेकर जांच की जाएगी, शिकायत आने पर भी टीम मौके पर पहुंचकर जांच करती है।।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीएम राकेश चौरसिया ने कहा:
“वर्षा काल शुरू हो गया है। पीएचई विभाग को निर्देशित किया जाएगा कि गांव-गांव जाकर हैंडपंपों में दवा डाली जाए।”

